शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima)

भारत ही एक ऐसा देश जहाँ त्यौहार की रौशनी हमेशा ही जगमगाती रहती है और ये हम सभी को विरासत(virasat) में मिला है। ये त्यौहार हमे ईश्वर से और एक दूसरे से जोड़ते है। और हमारे अंदर की आध्यात्मिक शक्ति को मजबूत करते है। शरद पूर्णिमा हिन्दू कैलेंडर में सबसे प्रसिद्ध पूर्णिमा में से एक है। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा(Sharad Purnima) वर्ष का एकमात्र दिन है जब चंद्रमा सभी सोलह कलाओं के साथ आता है। हिंदू धर्म में, प्रत्येक मानव गुणवत्ता कुछ कला से जुड़ी होती है और ऐसा माना जाता है कि सोलह विभिन्न कलाओं का संयोजन एक परिपूर्ण मानव व्यक्तित्व बनाता है। भगवान कृष्ण(krishna) का अवतार जो सभी सोलह कला के साथ अवतरित हुए थे। और वह भगवान विष्णु का पूर्ण अवतार थे। भगवान राम का जन्म केवल बारह कला के साथ हुआ था।

Sharad Purnima Moon

इसलिए, शरद पूर्णिमा के दिन भगवान चंद्र की पूजा करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन से उपवास शुरू करते हैं। गुजरात में, शरद पूर्णिमा को शरद पूनम के रूप में जाना जाता है। वहीं, खीर खाने से कई रोगों से मुक्ति मिलती है. इसीलिए आज खास तौर पर खीर बनाने की प्रथा है. इस दिन खीर बनाकर खुले आसमान में रखी जाती है और रात 12 बजे उसे खाया जाता है. इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है आज के दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, इसीलिए कुछ लोग इनकी की पूजा करते हैं .

शरद पूर्णिमा का समय और दिन  (Date and Time of Sharad Purnima):-

शरद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी (Sharad  Purnima Tithi Begins) = 22:36 on 23/Oct/2018
शरद पूर्णिमा तिथि सम्पन्न होगी (Sharad  Purnima Tithi Ends) = 22:14 on 24/Oct/2018

क्यों भक्तों के लिए बहुत विशेष है शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima):-

भगवान श्री कृष्ण(krishna) के जीवन से जुड़ी अद्भुत बातें है जो भक्तो को अपनी ओर खींचती है। शरद पूर्णिमा के दिन जब चंद्रमा सभी सोलह कलाओं के साथ आता है। और श्री कृष्ण भी सोलह कला के साथ अवतरित हुए थे। और यही वो दिन जिस दिन श्री कृष्ण ने गोपियों की मन की अभिलाषा पूरी की थी। क्युकी उन्होंने मन से अपना सब कुछ श्री कृष्ण के श्री चरणों में समर्पित कर दिया था। इस दिन को रास पूर्णिमा(Raas Purnima) के नाम से भी जानते है।

बृज क्षेत्र वृन्दावन( vrindavan) में शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा(Raas Purnima) क्यों कहाँ जाता है ?

कई क्षेत्रों में शरद पूर्णिमा को कोजागारा पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है जब पूरे दिन कोजागारा व्रत मनाया जाता है। कोजागारा व्रत को कौमुडी व्रत (कौमुदी व्रत) भी कहा जाता है।

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