आने वाली है भगवान कृष्ण की 5248वीं जयंती-श्री कृष्ण जन्माष्टमी महा महोत्सव - हमारी विरासत
आने वाली है भगवान कृष्ण की 5248वीं जयंती-श्री कृष्ण जन्माष्टमी महा महोत्सव

आने वाली है भगवान कृष्ण की 5248वीं जयंती-श्री कृष्ण जन्माष्टमी महा महोत्सव

जन्माष्टमी का उत्सव केवल भारत में ही नहीं जो बल्कि पुरे विश्व में जहा भी कृष्ण भक्त है वह भी इसे पूरी आस्था, श्रद्धा और आनंद के साथ मनाते हैं. श्री कृष्ण जी का अवतार भाद्र माह(अगस्त ) की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। उस समय रोहिणी नक्षत्र भी था। उनका जन्म मथुरा में कंस के जेल में हुआ था। तब से हर वर्ष इस तिथि को जन्माष्टमी या  श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव के रूप में मानते है।

कहते है आज भी इस तिथि को उनका प्राकट्य होता है लेकिन भक्तो को ह्रदय में जिसमे भक्ति( प्रेम) का वास् होता है। भगवान कृष्ण की मनमोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रध्दालु आज के दिन मथुरा पहुंचते हैं. इस दिन मंदिरों को सजाया जाता है. जन्माष्टमी के दिन स्त्री और पुरुष 12 बजे तक व्रत रखते हैं. उनके बारे में कोई क्या कह सकता है। “जो प्रेम से दिए माखन मिश्री पे रीझ जाये। जिसकी सिर्फ एक मुस्कराहट सारे दुःख हर ले जाये।” कहते है स्वभाव से कृष्णा बहुत नटखट है। लेकिन अपने भक्तो के अधीन है। जिसका जैसा भाव उसके अनुरूप वो ढल जाते है।

जन्माष्टमी 2021 शुभ मुहूर्त ( janmashtami kab hai):-

भगवान कृष्ण की 5248वीं जन्माष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी सोमवार, 30 अगस्त, 2021
निशिता पूजा का समय – 11:59 अपराह्न(PM) से 12:44 पूर्वाह्न(AM), 31 अगस्त
अवधि – 00 घंटे 45 मिनट

दही हांडी मंगलवार, अगस्त 31, 2021

पारण मुहूर्त (Janmashtmi paran timing):-

धर्म शास्त्र के अनुसार पारण:- Parana Time – after 09:44 AM, Aug 31 -> Reason:- (पारण दिवस पर रोहिणी नक्षत्र समाप्ति समय – 09:44 AM, पारण दिवस पर सूर्योदय से पहले समाप्त हुई अष्टमी)

धर्म शास्त्र के अनुसार वैकल्पिक पारण:- Parana Time – after 05:59 AM, Aug 31 -> Reason:- (देव पूजा, आदि के बाद अगले दिन सूर्योदय के समय पारण किया जा सकता है।)

समाज में आधुनिक परंपरा के अनुसार पारण:– Parana Time – after 12:44 AM, Aug 31 Reason-> (भारत में कई जगहों पर पारण निशिता यानी हिंदू मध्यरात्रि के बाद किया जाता है)

इसलिए इनमें से किसी भी तरीके से पारण (व्रत खोल ) सकते है। इसमें कोई दोष नहीं है।

मध्य रात्रि क्षण – 12:22 पूर्वाह्न(AM), 31 अगस्त
चंद्रोदय क्षण – 11:35 अपराह्न(PM) कृष्ण दशमी
अष्टमी तिथि शुरू – 29 अगस्त 2021 को रात 11:25 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त – 01:59 पूर्वाह्न(AM) 31 अगस्त, 2021
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ – 30 अगस्त 2021 को पूर्वाह्न(AM) 06:39
रोहिणी नक्षत्र समाप्त – 31 अगस्त 2021 को पूर्वाह्न(AM) 09:44

अन्य शहरों में कृष्ण जन्माष्टमी मुहूर्त:-

12:12 AM to 12:58 AM, Aug 31 – Pune
11:59 PM to 12:44 AM, Aug 31 – New Delhi
11:46 PM to 12:33 AM, Aug 31 – Chennai
12:05 AM to 12:50 AM, Aug 31 – Jaipur
11:54 PM to 12:40 AM, Aug 31 – Hyderabad
12:00 AM to 12:45 AM, Aug 31 – Gurgaon

12:01 AM to 12:46 AM, Aug 31 – Chandigarh
11:14 PM to 12:00 PM – Kolkata
12:16 AM to 01:02 AM, Aug 31 – Mumbai
11:57 PM to 12:43 AM, Aug 31 – Bengaluru
12:18 AM to 01:03 AM, Aug 31 – Ahmedabad
11:59 PM to 12:44 AM, Aug 31 – Noida

*Note:- अन्य शहरों के लिए मुहूर्त का समय संबंधित शहरों का स्थानीय समय है

*Note:- यहाँ पे 31 Aug का मतलब है 30 Aug के रात 12 बजे के बाद वाला

2021 कृष्ण जन्माष्टमी:-

जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्तों को जन्माष्टमी के एक दिन पहले एक समय ही भोजन करना चाहिए। उपवास के दिन, भक्त एक दिन के उपवास का पालन करने के लिए संकल्प लेते हैं और अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि समाप्त होने पर इसे खोलते हैं। रोहिणी नक्षत्र या अष्टमी तिथि समाप्त होने पर कुछ भक्त उपवास खोलते हैं। संकल्प सुबह की रस्मों को पूरा करने के बाद लिया जाता है और दिन भर के उपवास की शुरुआत संकल्प के साथ होती है।

कृष्ण पूजा करने का समय निशिता काल है जो वैदिक काल के अनुसार मध्यरात्रि है। भक्त मध्यरात्रि के दौरान विस्तृत अनुष्ठान पूजा करते हैं और इसमें सभी सोलह चरण शामिल होते हैं जो षोडशोपचार पूजा विधि का हिस्सा हैं। कृपया कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि देखें जिसमें पूजा करने के लिए वैदिक मंत्र के साथ जन्माष्टमी के लिए सभी पूजा चरणों को सूचीबद्ध किया गया है।

कृष्ण जन्माष्टमी पर व्रत के नियम:-

जन्माष्टमी के व्रत में तब तक अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए जब तक कि पारण मुहूर्त के बाद व्रत तोड़ा न जाए। एकादशी व्रत के दौरान पालन किए जाने वाले सभी नियमों का पालन जन्माष्टमी उपवास के दौरान भी करना चाहिए।

पारण अर्थात व्रत तोड़ना उचित समय पर करना चाहिए। कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के लिए अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने पर सूर्योदय के बाद अगले दिन पारण किया जाता है। यदि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्यास्त से पहले समाप्त नहीं होते हैं, तो अष्टमी तिथि या रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने पर दिन के दौरान उपवास तोड़ा जा सकता है। जब न तो अष्टमी तिथि और न ही रोहिणी नक्षत्र सूर्यास्त से पहले या यहां तक कि हिंदू मध्यरात्रि (जिसे निशिता समय के रूप में भी जाना जाता है) समाप्त हो जाता है, तो उपवास तोड़ने से पहले उन्हें खत्म होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए।-अष्टमी तिथि समाप्त – 01:59 पूर्वाह्न(AM) 31 अगस्त, 2021(मध्यरात्रि)

अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के अंत समय के आधार पर कृष्ण जन्माष्टमी पर उपवास पूरे दो दिनों तक जारी रह सकता है। जो भक्त दो दिन के उपवास का पालन करने में सक्षम नहीं हैं, वे अगले दिन सूर्योदय के बाद उपवास तोड़ सकते हैं। यह हिंदू धार्मिक ग्रंथ धर्मसिंधु द्वारा सुझाया गया है।

जन्माष्टमी को किन-2 नाम से पुकारते है:-

  • कृष्णष्टमी,
  • गोकुलाष्टमी,
  • अष्टमी रोहिणी,
  • श्रीकृष्ण जयंती और
  • श्री जयंती के नाम से भी जाना जाता है।

जन्माष्टमी व्रत व पूजन विधि(janmashtmi vrat aur oujan vidhi):-

पूजा सामग्री :- भगवान श्री कृष्ण की पूजा आराधना करने के लिए सामग्री कुछ इस तरीके से है।  पंचामृत, गंगाजल, दीपक, दही, शहद, दूध, दीपक, घी, बाती, धूपबत्ती, गोकुलाष्ट चंदन, अक्षत (साबुत चावल), तुलसी का पत्ता, माखन, मिश्री, भोग सामग्री।

  •  एक चौकी
  • एक खीरा
  • पीला साफ कपड़ा
  • बाल कृष्ण की मूर्ति
  • एक सिंहासन
  • पंचामृत
  • दही, शहद, दूध
  • दीपक,घी, बाती, धूपबत्ती
  • गोकुलाष्ट चंदन
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • तुलसी का पत्ता
  • माखन, मिश्री, भोग सामग्री।

बाल गोपाल( श्री कृष्ण) पूजन कैसे  करे:-

बाल गोपाल( श्री कृष्ण) का जन्म रात में 12 बजे के बाद होगा। बाल गोपाल को सबसे पहले आप दूध से उसके बाद दही, फिर घी, फिर शहद से स्नान कराने के बाद गंगाजल से अभिषेक किया जाता है, ऐसा शास्त्रों में वर्णित है। जिन चीजों से बाल गोपाल का स्नान हुआ है, उसे पंचामृत बोला जाता है। पंचामृत को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। फिर भगवान कृष्ण को नए वस्त्र पहनाने चाहिए।

कहते है भगवान के जन्म के बाद  मंगल गीत भी गाना चाहिये और कुछ नए भाव भी सुनने चाहिए। कृष्णजी को आसान पर बैठाकर उनका श्रृंगार करना चाहिए। उनके सिर पर मोरपंख लगा हुआ मुकुट पहनाएं और उनकी प्यारी बांसुरी उनके पास रख दें। उनके हाथों में चूड़ियां, गले में वैजयंती माला पहनाएं। फिर  अब उनको चंदन और अक्षत लगाएं और धूप-दीप से पूजा करनी चाहिए। फिर माखन मिश्री के साथ अन्य भोग की सामग्री अर्पण करें। ध्यान रहे, भोग में तुलसी का पत्ता जरूर होना चाहिए। तुलसी का पत्ता कृष्ण भगवान को अति प्रिय है। भगवान को झुला पर बिठाकर झुला झुलाएं और नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की का गाएं। साथ ही रातभर संकीर्तन करे ।

षोडशोपचारजन्माष्टमी पूजा विधि:-

हम विस्तृत कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि दे रहे हैं जो कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मनाई जाती है। दी गई पूजा विधि में सभी सोलह चरण शामिल हैं जो षोडशोपचार (षोडशोपचार) कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि का हिस्सा हैं।

  1. Dhyanam (ध्यानम्):-

पूजा की शुरुआत भगवान कृष्ण के ध्यान से करनी चाहिए। ध्यान आपके सामने पहले से स्थापित भगवान कृष्ण की प्रतिमा के सामने किया जाना चाहिए।

2. Avahanam (आवाहनं):-

भगवान कृष्ण के ध्यान के बाद, मूर्ति के सामने आवाहनं करना चाहिए, आवाहन मुद्रा दिखाकर (दोनों हथेलियों को जोड़कर और दोनों अंगूठों को अंदर की ओर मोड़कर आवाहन मुद्रा बनती है)।

3. Asanam (आसनं):-

भगवान कृष्ण का आह्वान करने के बाद, अंजलि (दोनों हाथों की हथेलियों को जोड़कर) में पांच फूल लें और उन्हें मूर्ति के सामने छोड़ दें और श्री कृष्ण को आसन अर्पित करें।

4. Padya (पाद्य):-

भगवान कृष्ण को आसन अर्पित करने के बाद मंत्र का जाप करते हुए उन्हें पैर धोने के लिए जल अर्पित करें।

5. Arghya (अर्घ्य):-

पद्य-अर्पण के बाद श्रीकृष्ण को सिर अभिषेक के लिए मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें।

6. Achamaniyam (आचमनीयं):-

अर्घ्य देने के बाद मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को अचमन के लिए जल अर्पित करें।

7. Snanam (स्नानं):-

आचमन के बाद मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को स्नान के लिए जल अर्पित करें।

8. Vastra (वस्त्र)

अब मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को नए वस्त्र के रूप में मोली (मोली) अर्पित करें।

9. Yajnopavita (यज्ञोपवीत):-

वस्त्रार्पण के बाद मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को यज्ञोपवीत अर्पित करें।

10. Gandha (गन्ध):-

यज्ञोपवीत चढ़ाने के बाद मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को सुगंध अर्पित करें।

11. Abharanam Hastabhushan (आभरणं हस्तभूषण):-

अब मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को आभूषण (अभूषण) अर्पित करें।

12. Nana Parimala Dravya (नाना परिमल द्रव्य):-

अब मंत्र का जाप करते हुए भगवान कृष्ण को विभिन्न प्रकार की सुगंधित वस्तुएं चढ़ाएं।

13. Pushpa (पुष्प):-

अब मंत्र का जाप करते हुए भगवान कृष्ण को पुष्प अर्पित करें।

14. Atha Angapuja (अथ अङ्गपूजा):-

अब उन देवताओं की पूजा करें जो स्वयं श्रीकृष्ण के शरीर के अंग हैं। उसके लिए बाएं हाथ में गंध, अक्षत और पुष्पा लें और उन्हें निम्नलिखित मंत्रों का जाप करते हुए दाहिने हाथ से भगवान कृष्ण मूर्ति के पास छोड़ दें।

15. Dhupam (धूपं)

अब मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को धूप अर्पित करें।

Deepam (दीपं):-

अब मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को दीप अर्पित करें।

16. Naivedya (नैवेद्य):-

अब मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को नैवेद्य अर्पित करें।

17 Tambulam (तांबूलं)

अब मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को तंबुला (सुपारी वाला पान) अर्पित करें।

18. Dakshina (दक्षिणा)

अब मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को दक्षिणा (उपहार) अर्पित करें।

19. Maha Nirajan (महा नीराजन)

अब मंत्र का जाप करते हुए श्री कृष्ण को निरजन (आरती) करें।

20. Pradakshina (प्रदक्षिणा)

अब मंत्र का जाप करते हुए प्रतीकात्मक प्रदक्षिणा (श्री कृष्ण के बाएं से दाएं परिक्रमा) को फूलों से अर्पित करें।

21. Namaskar (नमस्कार)

अब मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को प्रणाम करें।

22. Kshamapan (क्षमापन)

नमस्कार के बाद, मंत्र का जाप करते समय पूजा के दौरान की गई किसी भी ज्ञात-अज्ञात गलती के लिए श्री कृष्ण से क्षमा मांगें।

मंत्र:-

आपको जो भी मंत्र अच्छे से आता है। आप उसका जाप करके श्री कृष्णा का ध्यान लगा सकते है। क्युकी भगवान भाव और आपका प्रेम ही देखते है।

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