श्री बांके बिहारी जी के मंदिर में जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है ?

श्री बांके बिहारी जी के मंदिर में जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है ?

श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ा हुआ दिव्य स्थल है मथुरा वृन्दावन और नंदगाव। जब जन्माष्टमी के बात होती है तो सबसे पहले मथुरा-वृन्दावन का नाम सभी के जुबा पे आता है। क्युकी ये ही वो दिव्य स्थान है जिसको साक्षात् भगवान श्री हरि नारायण जी ने अपने प्राकट्य होने के लिए चुना। vrindavan janmashtami आयी के बारे में जाने।

बांके बिहारी जी मंदिर में जन्माष्टमी:-

वैष्णवों ( vaishnav sampraday ) के बीच में एक हर्ष उल्लास का अद्भुत संयोग देखने को मिलता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद माह के (कृष्ण पक्ष) के आठवें दिन मनाई जाती है। यह श्री बांके बिहारी मंदिर में एक अनोखे तरीके से मनाया जाता है कि इस दिन मंगला आरती की जाती है। किस तरीके से मनाई जाती है जाने।

जन्माष्टमी के दिन:-

जन्माष्टमी के दिन, सभी भक्त मंदिर में जिस तरह से रोज़ दर्शन करते है वो अद्भुत छटा का उस दिन भी दर्शन करते है।और शयन आरती (यानी 10:30 बजे) के बाद बिहारीजी हमेशा की तरह सोने चले जाते हैं। मंदिर के बाहर श्री कृष्ण जन्म कथा (दसवें स्कन्ध) पर आधारित एक श्रीमद भागवत(shrimad bhagwat) प्रवचन सत्र का आयोजन किया जाता है। पूरे मंदिर और परिवेश को फूलों, पट्टकों (झंडों), झूलों और रोशनी से सजाया गया है। जगमोहन (यानी गर्भगृह के ठीक बाहर ऊंचा हॉल) में सोने और चांदी से बना एक विशेष सिंहासन रखा जाता है (यह क्षेत्र आम तौर पर करीब दर्शन के लिए भक्तो के लिए सुलभ है, लेकिन किसी विशेष दिन ही इसे बहार लाया जाता है और बिहारीजी आंतरिक गर्भगृह से बाहर आते हैं। , इसलिए अधिक भक्तो के किये लिए व्यापक दृश्य हो सकता है)।

मध्य रात्रि में महा अभिषेक:-

मध्य रात्रि में महा अभिषेक आंतरिक गर्भगृह में किया जाता है, यह समारोह सार्वजनिक दृश्य के लिए खुला नहीं होता है। ये केवल गोस्वामी द्वारा किया जाता है । इस प्रक्रिया में, श्री विग्रह को दूध, दही, शहद, घी और जल से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के बाद, भगवान को इस विशेष अवसर के लिए बढ़िया कपड़े और गहनों से सजाया जाता है। नियमित रूप से सेवा के अन्य सभी चरणों जैसे फूल, तुलसी, चंदन, बेलभोग, बीरी, इतरा आदि का प्रसाद धार्मिक रूप से किया जाता है।

बिहारीजी जगमोहन के पास आते हैं और वहां की गद्दी पर विराजमान होते हैं। दर्शन लगभग 2 बजे खुलता है। यह एक बहुत ही विशेष मध्यरात्रि दर्शन सत्र है। जो सुबह 6 बजे तक जारी रहता है। बाल रूप में बिहारीजी का दर्शन यह बिलकुल असाधारण आकर्षक दर्शन होता है!

पंचामृत प्रसाद:-

पंचामृत प्रसाद (यानी महा अभिषेक का प्रसाद, दूध, दही, शहद, घी और पानी का मिश्रण) भक्तों में वितरित किया जाता है। विशेष रूप से तैयार की जाने वाली व्यंजनों यानी कस्तूरी तरबूज, नारियल, मखाने आदि से तैयार मिठाइयों को भोग के रूप में चढ़ाया जाता है।

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मंगला आरती:-

ये बिलकुल अलग नज़ारा होता है जो सिर्फ जन्माष्टमी को देखने को मिलता है। वो मंगला आरती जो की 3:30 बजे मंगला आरती की जाती है।

यह याद रखने योग्य है कि मंदिर में नियमित रूप से मंगला आरती (सुबह की आरती) नहीं की जाती है। यह केवल जन्माष्टमी के दिन होता है, वर्ष में एक बार, बिहारीजी को इस अखंड घंटे पर जगाया जाता है और मंगला आरती की जाती है। मंगला आरती के बाद सुबह 5 बजे भोग लगाया जाता है और 6 बजे आरती के बाद दर्शन बंद हो जाते हैं। vrindavan janmashtami

वृन्दावन बांके बिहारी जी के मंदिर में जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी ?

12 August 2020 और 3:30 बजे बिहारी जी के मंदिर में मंगला आरती की जाती है।

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