वृंदावन परिक्रमा (vrindavan parikrama ) के बारे में जाने - हमारी विरासत
वृंदावन परिक्रमा (vrindavan parikrama )

वृंदावन परिक्रमा (vrindavan parikrama )

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Description

निवेदन:- वृंदावन की परिक्रमा के बारे में जानने से पहले एक बात हम सभी को जान लेनी चाहिए कि भारतीय संस्कृति समय-समय पर हमें अध्यात्म से जोड़ने की बात करती है। अध्यात्म हमारे मन को पवित्र बनाता है और हमें एक शक्ति देता है जिससे हम जीवन की हर कठिनाई से लड़ सके और प्रेम के साथ जीवन का निर्वाह कर सकें। वृंदावन की परिक्रमा( vrindavan parikrama) अध्यात्म से जुड़ी परिक्रमा है भक्त और भगवान से जुड़ी हुई परिक्रमा है। आज हम वृंदावन की परिक्रमा के बारे में जानेंगे क्यों यह अपनी जगह पर महत्वपूर्ण रखता है क्यों इस पीढ़ी को और आने वाली पीढ़ी को इसके महत्व की गहराई को समझना चाहिए। vrindavan parikrama in hindi

“जानकारी अच्छी लगे तो सभी से शेयर जरूर करे क्युकी आज हमारी खोती हुई भारतीय संस्कृति जो विरासत में मिली उसको को प्रसार की जरुरत है जिससे आने वाली पीढ़ियों तक इसकी चमक पहुंच सके। और अपनी मातृभाषा हिंदी पे हमेशा गर्व कीजिये और इसका सम्मान-प्रसार जरूर कीजिये। “

वृंदावन परिक्रमा क्या है?:-

वृंदावन परिक्रमा को पंचकोसी परिक्रमा भी कहा जाता है। वृंदावन की परिक्रमा भक्तों के लिए वृंदावन परिक्रमा है। वृन्दावन जो श्री कृष्णा की बाल लीलाओ से भरा है। श्री राधा कृष्ण की दिव्य प्रेम लीला स्थली से परिपूर्ण है। जहाँ गोप गोपियों और ग्वाल वाल के साथ श्री कृष्णा ने बचपन में क्रीड़ा किया और अनन्य प्रसिद्द मंदिरो का संगम है। अगर कोई वृन्दावन के किसी भी प्रसिद्द स्थली परिक्रमा शुरू करे और इन सभी वृन्दावन की श्री कृष्णा की लीला और पारौणिक स्थान के चारो तरफ के मार्ग पे चलकर वापस उसी स्थान पे आ जाता है। तो उसे वृन्दावन परिक्रमा (vrindavan parikrama) कहते है। जो की पंचकोसी परिक्रमा है। इसे युगल सरकार (राधा-कृष्ण का एक मिश्रित रूप ) या साक्षात् राधा कृष्ण की परिक्रमा भी कहते है।

वृन्दावन परिक्रमा कब की जाती है ?

वृंदावन परिक्रमा, वृंदावन, उत्तर प्रदेश, भारत में आमतौर एकादशी पर किया जाता है। वैसे एक भक्त अपने भगवान की जब चाहे परिक्रमा कर सकता है। भक्ति भाव के लिए कोई दिन नहीं अपितु आपके भाव की निर्मलता जरुरी होती है। वृन्दावन बिहारी को सिर्फ आपका प्रेम भाता है। भक्त 10 किलोमीटर (6 मील) लंबी परिक्रमा पथ पर आते हैं। वृंदावन के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए दो से तीन घंटे लगते हैं।

ग्रंथ में वृन्दावन परिक्रमा का वर्णन :-

भविष्य पुराण में वृंदावन की परिक्रमा पांच कोस की बताई गई है। वराह संहिता में रास स्थली वृंदावन की परिधि एक योजना बताई गई है। किंतु वृंदावन की वर्तमान परिक्रमा साढ़े 3 कोस की है। वर्तमान परिक्रमा प्राय सूर्य घाट से प्रारंभ होती है। यह परिक्रमा नंगे पांव करना जरूरी है। अनंत गुना फल इसका प्राप्त होता है।

वृंदावन PARIKRAMA मार्ग(vrindavan parikrama marg):-

यह रास्ता बांके बिहारी जी मंदिर से एक सड़क पर है।या आप इसे कालिया घाट से शुरू कर सकते है। न समझ ए तो किसी वृन्दावन वासी संत से या निवासी से आप सहज पूछ सकते है। सब वहाँ बहुत ही सरल सवभाव के है। वृंदावन परिक्रमा में आमतौर पर दो से तीन घंटे लगते हैं। परिक्रमा पथ 10 किमी (6 मील) है। रास्ते में गुजरने वाले कुछ स्थान हैं: यमुना जी के तट पर मदन टेर, कालिया घाट, मदना मोहना मंदिर, इमली ताला, श्रृंगारा वट, और केशी घाट, यमुना महारानी आदि, फिर शेष घाट से धीरा समीरा, टटिया स्थन आदि।

श्री वृन्दावन सो वन नहीं, श्री नंदगाँव सो गाँव ||

श्री बंसीवट सो वट नहीं, श्री कृष्ण नाम सो नाम ||.

परिक्रमा में बारह वन (वन) और चौबीस उपवन (उपवन) शामिल हैं।:-

बारह वन हैं:-

  1. बाहुलवन
  2. बेलवन,
  3. भद्रवन,
  4. भंडिरावन,
  5. कामवन,
  6. खदिरवन,
  7. कुमुदवन,
  8. लोहवन,
  9. महावन,
  10. मधुवन,
  11. तलवन
  12. और वृंदावन

चौबीस उपवन (उपवन) :-

  1. बद्री,
  2. अजनोक,
  3. अरिंग,
  4. बरसाना,
  5. बछावन,
  6. बिल्छू,
  7. दधिग्राम,
  8. गंधर्ववन,
  9. गोकुल,
  10. गोवर्धन,
  11. करहला,
  12. केलवन,
  13. कोकिलावन,
  14. कोटवन,
  15. चटाई,
  16. नंदग्राम,
  17. पारसोली,
  18. परमदरा,
  19. पिसाया,
  20. रावल,
  21. साकेत,
  22. श्रीसाई,
  23. श्रीसाई।
  24. निधिवन

कुछ महत्वपूर्ण मंदिर, वन और घाट जो की परिक्रमा मार्ग पे देखने को मिलते है।

  • कृष्ण बलराम मंदिर
  • गौतम ऋषि का आश्रम
  • वराह घाट
  • मोहना टेर
  • कालिया घाट
  • मदन मोहन मंदिर
  • इमली ताल
  • श्रृंगारा वट
  • केशी घाट
  • टेकरी रानी मंदिर
  • जगन्नाथ मंदिर, जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के देवताओं के साथ
  • चैतन्य महाप्रभु मंदिर

परिक्रमा के मार्ग के साथ कई अन्य मंदिर और मूर्तियाँ हैं, जिनमें से कुछ मुगल हमले के दिनों से टूटी-फूटी स्थिति में हैं। परिक्रमा के अंत में, देवता और यमुना के तट पर जलाए जाने वाले दीपक की प्रार्थना की जाती है।

वृंदावन के छह गोस्वामी:-

वृंदावन को फिर से परिभाषित करने का श्रेय इन गोस्वामियों को जाता है, जिन्हें वृंदावन के छह गोस्वाम कहा जाता है, जिनके बारे में व्यापक शोध किया गया है। और किताबें प्रकाशित हुई हैं। चर्मपत्र के पत्तों पर लिखे गए छह में से कुछ मूल लेखन को वृंदावन अनुसंधान संस्थान में संरक्षित और प्रदर्शित किया गया है।

वृंदावन परिक्रमा के नियम:-

  • वृंदावन परिक्रमा प्रेम भक्ति भाव समर्पण की परिक्रमा है .
  • यहां पर हर एक पग श्री कृष्ण को श्री राधे नाम को सुमिरन करते हुए रखनी चाहिए।
  • उनसे हर श्वास पे एक ही विनती करनी चाहिए उनके चरण कमलों की भक्ति मिले और हमारा मन हमेशा निर्मल भाव से भरा रहे। हमसे कभी भी किसी का अहित ना हो जीवन में।
  • परिक्रमा मार्ग पर मंत्र जाप करते हुए चलना चाहिए
  • याद रहे परिक्रमा मार्ग पर आप से किसी का अपमान ना हो।
  • परिक्रमा मार्ग में परिक्रमा करते समय हमें कुछ खाना नहीं चाहिए
  • परिक्रमा नंगे पांव करें अगर आप कर सकते हैं तो
  • क्योंकि ब्रजराज आपके चरणों पर जब-जब ब्रजराज आपके पैरो को स्पर्श होगा आपको भक्ति-आनंद का अनुभव होगा।
  • परिक्रमा करते समय आसपास के जितने दिव्य स्थल पड़ते है उनको प्रणाम जरूर करे।
  • आज वृन्दावन का थोड़ा आधुनिक स्वरुप हो गया है उसे देख कर परिक्रमा करते समय यह बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए कि वृंदावन मैं पहले जैसी बात नहीं बस हमेशा याद रखें वृंदावन प्रेम की भक्ति की भूमि है। अगर आपका मन सच्चा है तो वृंदावन बिहारी आपको इस वृंदावन में 1 दिन दिव्य वृंदावन का दर्शन जरूर करवाएंगे .
  • राधे राधे नाम का जितना हो सके उच्चारण जरूर करे।

वृन्दावन प्रथम बार :-

अगर आप वृन्दावन प्रथम बार आए हैं पहली बार आए हैं तो आपको वृंदावन की महिमा के बारे में जरूर जाना चाहिए वृंदावन के प्रसिद्ध मंदिर के बारे में जरूर जाना चाहिए। यहां पर जितने भी मंदिर है उनका श्री कृष्ण से नाता है वह उनकी लीला को सुमिरन करते हुए बनाया गया है। जिस जगह श्री कृष्ण ने जो लीला की थी उस लीला से को ध्यान में रखकर कई युगों पहले इन मंदिरों की नींव रखी गई जिससे कि आने वाली पीढ़ी इसके महत्व को समझ सके श्री कृष्ण के जीवन के अनमोल ज्ञान भक्ति को फिर से जी सकें और उससे प्रेम भक्ति को प्राप्त कर अपने जीवन को निर्मल बना सकें। सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करे वृंदावन

distance from delhi to vrindavan via yamuna expressway:- The distance between Delhi and Vrindavan on this route is somewhere around 183 KM and takes roughly 3.5 hours.

नोट : अगर आप कुछ और जानते है या इसमें कोई त्रुटि है तो सुझाव और संशोधन आमंत्रित है।

वृंदावन परिक्रमा कब की जाती है?

आमतौर एकादशी पर किया जाता है। वैसे एक भक्त अपने भगवान की जब चाहे परिक्रमा कर सकता है।

वृंदावन परिक्रमा कितने किलोमीटर की है?

Approx 10Km

वृंदावन परिक्रमा route क्या है ?

बांके बिहारी जी मंदिर से एक सड़क से या आप इसे कालिया घाट या इस्कॉन मंदिर से शुरू कर सकते।

वृंदावन परिक्रमा के लाभ क्या है ?

राधे -कृष्ण के युगल चरणों की भक्ति प्राप्त होती है। बाकि आपकी जो निर्मल कामना होगी उसकी पूर्ति होगी।

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