जो इंसान भगवान को जानता नहीं वो सिर्फ बोलता ही रहता है

लेकिन जो उसे जान लेता है फिर वो बोल ही नहीं पाता है

भगवान को जिसने देखा:-

भगवान को जिसने भी देखा उसका यही कहना था। दूसरे कितने भी भगवान के बारे में आपको बताये लेकिन आप नहीं जान पाएंगे उन्हें।  भगवान को बातो से कभी नहीं समझा जा सकता , उनके बारे में जितना कहा जाये उतना काम है और जितना कहा जायेगा वो हमेशा अधूरा ही कहा जायेगा।

जो सिर्फ बातो से पूर्ण हो जाये वो पूर्ण परमात्मा सिर्फ इतना ही नहीं

कौन देख सकता है भगवान को ?

भगवान के बारे में आप जितना सुनेगे उतनी आपकी श्रद्धा बढ़ेगी ये सच है लकिन उनको आप जभी देख पाएंगे जब उनकी खुद आप पर कृपा होगी। भगवान को केबल बुद्धि से नहीं जाना जा सकता या पाया जा सकता है। क्यूंकि बुद्धि की पहुंच भगवान तक तो है ही नहीं अगर सिर्फ बुद्धि से भगवान मिल जाते तो इस दुनिया में बुद्धिवान की कोई कमी थोड़ी नहीं है। संसार में शातिर, चालक ,बुद्धिमान लोग तो भरे पड़े है।

सीधे साधे भक्त को वो तुरंत ही मिल जावै

रामकृष्ण परमहंस के जीवन की एक घटना :-

एक बार उन्होंने अपने अंधे मित्र को खाने पे बुलाया। वो अँधा इंसान बहुत प्रसन्न हुआ स्वामी जी से मिलकर। उन्होंने बहुत प्रकार के व्यंजन खिलाये। और कुछ देर बाद अंधे इंसान ने कहा ये चीज़ बहुत स्वादिस्ट है क्या है ये ? स्वामी जी ने कहा ये खीर है। उसने कहा मित्र ये खीर कैसा होता है उन्होंने कहा सफ़ेद रंग का होता है उसने कहा मित्र ये सफ़ेद रंग वो कैसा होता है ? अब वो तो अँधा था उसे समझ नहीं आ रहा था।
तो स्वामी जी ने समझना के लिए कहा वो तो बगुले के जैसा होता है फिर उसने पूछा ये बगुला कैसा होता है उन्होंने कहा वो टेढ़ा होता है तो फिर उस व्यक्ति ने कहा” अब समझा खीर टेढ़ी होती है। “
इस कहानी से हमें ये सीखें को मिलता है जिसने ईश्वर को कभी देखा ही नहीं और जिसने देखा है वो चाहे कितने भी कोशिश कर ले वो अपना अनुभव किसी को बता नहीं सकता अगर बता भी दे तो समझा नहीं सकता।
केबल आपकी श्रद्धा और विश्वास ही उसको आपके उसके सामने ला सकती है

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