आज खोते मानवता को एक गहन चिंतन की जरुरत क्यों आन पड़ी ? - हमारी विरासत
आज खोते मानवता को एक गहन चिंतन की जरुरत क्यों आन पड़ी ?

आज खोते मानवता को एक गहन चिंतन की जरुरत क्यों आन पड़ी ?

भगवान की बनाई दुनिया में इंसान सबसे खूबसूरत रचना है। इंसान को बनाकर भगवान निश्चिंत हो गए कि इस पृथ्वी पर हर जीव की रक्षा करने में इंसान समर्थ है योग्य है क्योंकि इंसान में इंसानियत या आप कह सकते हैं मानव में मानवता सबसे बड़ा भगवान का दिया गया गुण है। लेकिन बीते कुछ समय में हम सभी देख रहे हैं मानव मानवता को भूलता जा रहा है और साथ में उसने पृथ्वी पर और जीवो कि सत्ता के महत्व को नकारना शुरू कर दिया है। हम सभी जानते हैं भारत देश अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। हम सभी इस देश में जन्म लेने के कारन विरासत में मिले इस गौरवशाली इतिहास का सम्मान पाते आ रहे है। लेकिन आज हम यह साबित करते जा रहे हैं हम इसके सही हकदार नहीं है। मानवता ही वो गुण है जो अपने पराए इस से ऊपर उठकर सबके लिए काम करती है। चाहे वह इंसान हो या इस पृथ्वी पर रहने वाला कोई भी जीव जंतु जिनमे प्राण है।

Elephant died in kerala 2020 in hindi

हाल ही में केरल के साइलेंट वैली फॉरेस्ट में एक गर्भवती हथिनी को कुछ शरारती तत्वों ने अनानास में विस्फोटक खिला दिया. जिससे हथिनी के मुंह में पटाखे से भरा अनानास फट गया. हथिनी के सारे मसूड़े बुरी तरह फट गए और वह खा भी नहीं पा रही थी. कुछ समय के बाद हथिनी की मौत हो गई.

A Small scenario of elephant died in Kerala 2020

मानवता खोने के कगार पर हैं :-

जो गर्भवती हथिनी के साथ यह घटना हुई है वहीं दर्शाता है खोते मानवता को एक गहन चिंतन की जरुरत है हम मानवता को खोने के कगार पर हैं यह तो सिर्फ एक पहलू है लेकिन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से और भी कई घटनाएं आये दिन होती रहती है। हम बस मूक बन के देखते रहते है और अफ़सोस जताते है। वैसे भी जिस तरह पूरा विश्व कोरोना वायरस के प्रकोप का सामना कर रहा है वह प्रकृति का एक छुपा हुआ संदेश है मानव जाति को। हमें यह नहीं भूलना चाहिए सिर्फ मानव ही नहीं इस पृथ्वी पर जितने भी जीव जंतु और जिनमें प्राण है।

  • वह सभी प्रकृति की गोद में है। और प्रकृति के नज़रो में सबके लिए समानता है।
  • प्रकृति उन सभी का सृजन करती है प्रकृति मानव की ही नहीं अपने सभी रचना को उतना ही प्रेमभाव से सृजन करती हैं जिस तरह से एक मां अपने कई संतानों की करती है।
  • वह सब से बराबर प्रेम करती है . जिस तरह से एक मां की कई संतान फिर भी वह सब से बराबर प्रेम करती है अगर कोई एक संतान अपने अस्तित्व को ही सब कुछ समझें और बाकी के अस्तित्व को कोई महत्व ना दें उसका दोहन करें तो उसकी मूर्खता होगी क्योंकि मां की दृष्टि उस पर भी है और सभी पर हैं।

प्रकृति का सामान नजरिया :-

इसी तरह प्रकृति सबसे सामान प्यार करती है। जब इंसान सिर्फ अपनी सत्ता को ही सर्वश्रेष्ठ मानने लगता है और बाकी प्राणी की सत्ता को नकारने लगता है। तब इंसान इंसानियत को भूलने लगता है। इंसान को समझना होगा उन सभी का दर्द जिनमें जीवन है इस पृथ्वी पर इंसान अकेला नहीं है जो अस्तित्व में है यह प्रकृति जीव जंतु और कई जिनमें प्राण है और इस ब्रह्मांड की रचना उनका भी अस्तित्व है। उसको नकारा नहीं जा सकता.

  • सिर्फ एक दूसरे पे आरोप लगाकर हम मानवता को नहीं बचा सकते अगर हम सिर्फ अपनी दुनिया या अपने जीवन को संपदा से भरने में ही पूरा समय देते रहेंगे तो हम कभी नहीं समझ पाएंगे कि मानवता का सही धर्म क्या है।
  • आप पूरी दुनिया को नहीं बदल सकते लेकिन वह जरूर कर सकते हैं जितना करने के लिए आपकी अंतरात्मा आपको मार्ग दिखाती है। मानवता को खोकर हम क्या बचा लेंगे चाहे हम कितनी भी तरक्की करें लेकिन हम अपनी गौरवशाली इतिहास के उस पहचान खो देंगे आने वाली पीढ़ियां कभी उसको नहीं देख पाएंगे
  • हम सभी के अंदर एक परम सत्य का निवास है हम चाहे उसे किसी भी रूप में पूजते हो उसके संपर्क में रहे हमारे मानवता को वह दानवता में नहीं बदल ने देगे और आपको सही रास्ता दिखाएंगे।

आध्यात्मिक जागृति दिखावे में नहीं आंतरिक दुनिया में होना बहुत जरूरी है। युवा पीढ़ियों को हमेशा जागरूक रहना पड़ेगा अपने देश के गौरवशाली शान को बनाए रखने के लिए। और मानवता को पोषित करते रहना होगा, मदद करना, दया, सेवा प्रेम भाव हमारे मानवता को पोषित करती है।जिससे सभी प्रेरणा ले सके। और हम कितनी भी तरक्की कर ले उससे सिर्फ दिखावे की सम्पनता इकठा कर सकते है। जबकि मानवता या इंसानियत के प्रकाश में हमें खुद के अस्तित्व को और पृथ्वी पर और जितनी भी सजीव प्राणी है, जीव है उनके दर्द को महसूस कर सकते हैं। उस दिशा में कार्य कर सकते हैं।

कौन सही कौन गलत सिर्फ देखोगे तो प्रकृति के संदेश को नहीं समझ पाओगे।
मानवता या इंसानियत के सफर पे चलकर देखो प्रकृति का मुस्कुराता हुआ छवि पाओगे।

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