क्या रहस्य छुपा है भगवान श्री कृष्ण के शरीर के नीले/श्याम  रंग के पीछे

हिन्दू धर्म के अनुसार श्री कृष्ण भगवान विष्णु के 8 वे अवतार कहलाते है तथा अब तक भगवान विष्णु के 23 अवतार हो चुके है. जब-जब इस पृथ्वी पर असुरो का आतंक बढ़ा है तथा अधर्म व्याप्त हुआ है तब-तब भगवान विष्णु ने किसी न किसी अवतार में अवतरित होकर इस पृथ्वी का उद्धार किया है. श्री कृष्ण के अवतार के रूप में उन्होंने न केवल इस पृथ्वी से पाप के भार को कम किया था बल्कि भगवत गीता के रुप में प्रत्येक मनुष्य को उसके वास्त्विक उद्देश्य का भी बोध कराया था. प्रेम के साक्षात् मूरत भगवान कृष्ण ने जीवन के अलग अलग पहलुओं को बड़ी ही सहजता के साथ समाज के सामने रखा.

अपने प्रिय मित्र सुदामा को मुक्ति दिलाने से लेकर महभारत के युद्ध में अर्जुन को उनके दायित्वों का बोध कराने तक, श्री कृष्ण हर जगह हर समय उपस्थित रहे.

 

भगवान श्री कृष्ण का रंग नीला/श्याम :-

यहाँ पर अलग अलग लोगों द्वारा बनाई गई किंवदंतियों और मिथकों का वर्णन किया जा रहा है. जिसे लोग अपनी मान्यता के अनुसार मानते हैं. पौराणिक कथाओ के अनुसार श्री कृष्ण के नीले रंग को प्राप्त करने के पीछे यह कहा जाता है की भगवान श्री विष्णु ने धरती में अवतरित होने से पूर्व देवकी के गर्भ में दो बाल निरुपित किये थे, जिनमे एक बाल का रंग नीला व दूसरा सफेद था तथा दोनों ही बाल माया के प्रभाव से चमत्कारिक रूप में रोहणी के गर्भ में स्थापित हो गए. सफेद रंग के बाल से बलराम का जन्म हुआ तथा नीले रंग के बाल से श्याम वर्ण के भगवान श्री कृष्ण(shri krishna) का जन्म हुआ .

  1. भगवान श्री कृष्ण के नीले रंग के पीछे एक मान्यता ये है कि भगवान श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. भगवान विष्णु सदा गहरे सागरों में निवास करते हैं. उनके इन सागरों में निवास करने की वजह से भगवान श्री कृष्ण का रंग नीला है. हिन्दू धर्म में जिन लोगों के पास बुराइयों से लड़ने की क्षमता होती है और जो लोग चरित्रवान होते हैं, उनके चरित्र को नीले रंग का माना जाता है. कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि, व्रत एवं महत्व यहाँ पढ़ें.
  2. शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण के नीले रंग के पीछे यह भी मान्यता है की प्रकृति द्वारा उसकी अधितकर रचना नीले रंग की है जैसे सागर तथा आकाश व इन सभी में धैर्य, साहस, समर्पण, त्याग व शीतलता जैसी भावनाएं देखी जा सकती है भगवान श्री कृष्ण भी इन्ही सर्वगुणों से सम्पन्न शांत और सहज स्वभाव के थे. बर्ह्म संहिता में भगवान श्री कृष्ण को नीले बदलो के साथ छमछमाते हुए कहा गया है.
  3. शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण के नीले रंग के पीछे यह भी मान्यता है की प्रकृति द्वारा उसकी अधितकर रचना नीले रंग की है जैसे सागर तथा आकाश व इन सभी में धैर्य, साहस, समर्पण, त्याग व शीतलता जैसी भावनाएं देखी जा सकती है भगवान श्री कृष्ण भी इन्ही सर्वगुणों से सम्पन्न शांत और सहज स्वभाव के थे. बर्ह्म संहिता में भगवान श्री कृष्ण को नीले बदलो के साथ छमछमाते हुए कहा गया है.
  4. वही अन्य मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का नीला रंग उनके मामा कंश द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना के विषपान से हुआ है.
  5. कहा जाता है कि यमुना नदी में एक कालिया नामक नाग रहता था, जिसके कारण गोकुल के सभी निवासी परेशान थे. अतः जब भगवान कृष्ण कालिया नाग से लड़ने गये तो युद्ध के समय उसके विष के कारण भगवान कृष्ण का रंग नीला हो गया.

क्यों भगवान श्रीकृष्ण जी के जन्म(janmashtami) की कथा अद्भुत है ?

इस तरह से भगवान श्री कृष्ण के नीले रंग के पीछे छिपे कारण को कई लोग अपने अपने हिसाब से वर्णित करते हैं. इसके पीछे कई मिथक एवं किन्वंदतियाँ हैं तो यह जानना बहुत दुर्लभ है कि कृष्ण का रंग नीला होने की क्या वजह है.

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