राधा-कृष्णा प्रेम (Radha-Krishan love)

राधा ही कृष्ण और कृष्ण ही राधा क्यों है ?

राधा कृष्णा(radha krishna) कोई दो नहीं थे।  दुनिया की नज़रो में वो दो थे, लेकिन राधा जी के नज़रो में सिर्फ कृष्ण थे और कृष्ण जी की नज़रो में सिर्फ राधा जी थी। प्रेम सिर्फ पाने का नाम नहीं ना ही प्रेम न मिलने से खो जाता है सच्चा प्रेम अनमोल होता है। प्रेम में शब्दों का खेल नहीं होता है यहाँ तो आँखों से सब बया कर दिया जाता है। सच्चे प्रेम में तो उनकी यादें में छू जाये तो पता चल जाता है की वो आपको याद कर रहे है।

श्री कृष्ण जी खुद कहते थे मैं राधा सरोवर प्रेम(radha krishna love) का सिर्फ एक हंस हूँ।

हे कृष्णा,

जब आये आप तकदीर बनती चली गयी।

हर चीज अपने से निखरती चली गयी।

गुजरे आप जिस भी रह गुजर।

खुशबु आपकी फिजाओं मे बिखरती चली गयी।

श्री जी का आगमन:-

यह सब जानते है , भगवान कृष्ण ने राधा जी को पृथ्वी पर जन्म लेने का आग्रह किया। यह भादो (सितंबर के महीने में ), शुक्ल पक्ष की अष्टमी, अनुराधा नक्षत्र का समय था और समय 12 बजे जब राधा रानी इस दुनिया में प्रकट हुई।

रावल:-

श्री राधा जी का जन्मस्थान रावल है, मथुरा शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर एक छोटा गांव है। ऐसा कहा जाता है कि एक दिन बृषभानु जी एक नदी में स्नान कर रहे था, तभी उन्होंने एक कमल देखा जो कि हजारों पंखुड़ियों वाला था और वह सूर्य के प्रकाश में सुनहरा कमल जैसा दिखता था और जब वह करीब आ गया, तो उन्होंने उस फूल के अंदर एक छोटी बच्ची को देखा और उस बच्ची को उन्होंने भगवान का आशीर्वाद समझ कर ले लिया और उसे अपनी बेटी के रूप में घर ले आये ।

 

कृष्ण के लिए दिव्य प्रेम:-

श्री राधा जी ने अपनी आँखें नहीं खोलीं, जब तक कि वह भगवान कृष्ण के सुंदर चेहरे को नहीं देखा। वृषभनु और उनकी पत्नी बहुत परेशान थे और इस धारणा के तहत कि लड़की अंधी थी। जन्म से ही अपार शुद्ध प्रेम(radha krishna ka pyar)
ग्यारह महीनों के बाद, जब अपने परिवार के साथ वृषभनू नंदबाबा को देखने के लिए गोकुल गए तो श्री राधा जी ने अपनी आंखें पहली बार खोली वो भी जब नंदबाबा बाल गोपाल श्री कृष्ण को उनके सामने लाये। अपने स्वामी आकर्षक चेहरे को देखने के लिए राधा रानी ने अपनी अपनी आंखें खोल दीं। वह पहली बार अपनी आँखें खोलने पर श्री कृष्ण जी का चेहरा देखना चाहती थी और यही कारण था कि उन्होंने अब तक अपनी आंखें नहीं खोली थी।

आये जाने वृन्दावन के बारे में

गह्वर वन जहा राधा कृष्णा पहली बार अकेले मिले:-

बरसाने से कुछ किलोमीटर दूर गह्वर वन है यही वो जगह है जहा राधा कृष्णा पहली बार अकेले मिले। जहा उन्होंने कुछ समय साथ में व्यतीत किया। जहा श्री कृष्ण ने राधा रानी के बालों को फूलो से सजाया था।

 

वृंदावन और उनके प्यार:-

उनका प्रेम वृंदावन की जमीन पर उग आया जो माना जाता है कि श्री जी का दिल और ब्रह्माण्ड में सबसे अधिक धन्य भूमि है । उन्होंने यमुना के तट पर महा-रास लीला किया जो को युगो युगो तक नहीं भुलाया जा सकता ये अटूट भक्ति (प्रेम ) का संगम था। लेकिन तब वह समय भी आ गया जब शाप के कारन कृष्णाji को राधा जी से अलग होना पड़ा। उनसे दूर जाना पड़ा। लेकिन वो कहते है ना जिनकी रूह एक दूसरे की रूह में समायी होती है वो अलग कहा होते है। कंस को मारने के लिए श्री कृष्णा को मथुरा जाना पड़ा।

जाने से पहले, श्री कृष्णा जी ने ,श्री राधा जी से अपना वचन लिया को वो उनकी याद में कभी आँसू नहीं बहायेंगी।

जब छोड़ चले श्री कृष्णा राधा जी को :-

श्री राधा जी ने  वादा किया कि वो नहीं रोयेंगी और आँसू नहीं बहाएंगे। श्री राधा जी ने  वादा किया कि वो नहीं रोयेंगी और आँसू नहीं बहाएंगे। कृष्ण ने उससे कहा कि उनका प्यार बिना शर्त का है और हमेशा रहेगा। मैं समय के अंत तक तुम्हारा ऋणी बना रहूँगा और वो हमेशा उनके साथ देखी जाएँगी। मेरे नाम से पहले हर कोई तुम्हारा नाम लेगा।  और हम आज देख सकते हैं कि वृंदावन में लोग या ब्रजवासी कहते है राधे राधे कहो चले आएंगे कृष्णा।

जिंदगी का वो सबब याद आ रहा है

जब प्रेम निस्वार्थ होता है तब क्या होता है:-

निस्वार्थ प्रेम की निशानी वृन्दावन धाम है जहा सिर्फ राधे ही राधे नाम है

आज वृन्दावन में हर तरफ राधे राधे है। यहां तक कि रिक्शा वाला रास्ता मांगने के लिए रास्ते भी सिर्फ राधे राधे नाम का प्रयोग करते है। वृंदावन में हर घर या वृक्ष पे श्री राधा का नाम लिखा गया है। श्री राधा जी का भक्ति(प्रेम ) और दर्द ऐसा था कि कृष्ण ने उसे एक वरदान दिया कि उनका  नाम श्री कृष्णा जी से पहले लिया जाएगा।

सच्चे प्रेम(radha krishna love) को कोई कहा कैद कर पाया

सच्चा प्रेम तो उस फूलो की खुशबू की तरह है जिसे छुआ नहीं जा सकता

सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

जिसने महसूस कर लिया उसका जीवन भी प्रेम भरी खुशबु से महकने लगेगा।

[ratings]

  1. Aisa pyr ab nhi milta radha krish ki trha

    1. Admin

      kyuki pyar(prem) ko jeene ke liye khud hee prem roop hona padta hai. Aaj hum pyar ko pana chahate hai aur nahi mila to dusri tarf chale jate hai . kyuki jaha pyar nhai hai wahi bhatkaw hai wahi pane ki chaha hai. jisko ko bhi radhe krishna ki tarh prem hota hai vo smjh jate hai . jab apke dil mei prem ata hai to apko pana nahi padta usko apne usi waqt paa liya hota hai. Aisa pyar aaj bhi hai per jo aisa pyar karte hai vo dikhte nahi khamosh rah jate hai.
      radhe radhe

  2. ❤️❤️radhe radhe❤️❤️
    aaj ki dunia me aisa pyar milna muskil hi nahi namumkin hai.

  3. eas duniya ma bhi kahi na kahi asa pyar hai tabhi radha krishna ka naam liya jata hai aaj bhi…..kahi to hoga he kuch bhi na mumkin nhi hai kyu ke. radha khrishan

  4. H mera pyar radha krishna jeaa jisme ahsas se b ek duje ko feel krte h duriyo m b najadikiya feel hoti mera mere love sm radhe krishn jese h

    1. virasat-admin

      hare krishna…bahut kam log aisa keh pate hai..har roop mei vo hai…pechan liya to vo dur kaha…You’re very lucky.
      Shri Radhe..

  5. […] […]

  6. राधे कृष्णा जी
    लव यु

  7. Prem amar or azar h
    Radhe radhe

    1. admin

      Jo pane aur khone ke daar se upar uth jaye. Vo sache pyar ko samjh sakta hai..kyuki rooho ka pyar, antaraatma se kiya gya pyar kabhi galat(jutha) nahi hota.
      radhe radhe

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