घटस्थापना के नियम-घटस्थापना मुहूर्त(navratri ghatasthapana)
नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापित करने की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे घटस्थापना या कलश स्थापना कहते हैं।
कई परिवारों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। कहीं मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं, कहीं सप्तधान्य का प्रयोग किया जाता है और कहीं देवी के समक्ष कलश स्थापित करके नियमित पूजा की जाती है।
यदि आप पहली बार नवरात्रि में घटस्थापना कर रहे हैं, तो मन में कई प्रश्न आ सकते हैं—कलश में क्या भरना चाहिए? नारियल कैसे रखें? जौ कैसे बोएं? कलश कहां स्थापित करें? और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
आइए घटस्थापना की एक प्रचलित घरेलू विधि को सरल भाषा में समझते हैं।
घटस्थापना 2026 कब है और शुभ मुहूर्त क्या है?
शारदीय नवरात्रि 2026 की घटस्थापना 11 अक्टूबर, रविवार को की जाएगी।
दिल्ली के पंचांग के अनुसार:
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| प्रातःकालीन घटस्थापना | 6:19 AM से 10:12 AM |
| अभिजित मुहूर्त | 11:44 AM से 12:31 PM |
घटस्थापना के लिए आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के प्रातःकाल को प्राथमिकता दी जाती है।
यदि प्रातःकाल में पूजा संभव न हो, तो पंचांग में निर्धारित अभिजित मुहूर्त का विकल्प देखा जा सकता है।
ध्यान दें: मुहूर्त हर शहर के लिए एक जैसा नहीं होता। अपने स्थान के अनुसार स्थानीय पंचांग देखना आवश्यक है।
घटस्थापना का धार्मिक महत्व
‘घट’ का अर्थ पात्र या कलश है और ‘स्थापना’ का अर्थ उसे विधिपूर्वक स्थापित करना है।
धार्मिक परंपरा में जल से भरे कलश को पवित्रता, मंगल और जीवन का प्रतीक माना जाता है। देवी उपासना के समय कलश में मां दुर्गा का आह्वान करने की परंपरा है।
कलश के साथ रखे गए जौ या धान्य धरती की उर्वरता और नवीन जीवन का संकेत देते हैं।
इस प्रकार घटस्थापना में जल, मिट्टी, बीज, पत्ते और नारियल जैसी प्राकृतिक वस्तुएं शामिल होती हैं। यह अनुष्ठान भारतीय संस्कृति में प्रकृति और आध्यात्मिकता के संबंध को भी दर्शाता है।
घटस्थापना की पूजा सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले सामग्री एक स्थान पर एकत्र कर लें।
- मिट्टी का चौड़ा पात्र या थाली
- साफ मिट्टी
- जौ या परिवार की परंपरा के अनुसार सप्तधान्य
- मिट्टी, तांबे या पीतल का स्वच्छ कलश
- स्वच्छ जल या गंगाजल
- आम अथवा अशोक के पांच पत्ते
- जटा वाला साबुत नारियल
- लाल चुनरी या लाल वस्त्र
- मौली या कलावा
- अक्षत यानी बिना टूटे चावल
- सुपारी, सिक्का और दुर्वा
- पुष्प, रोली और चंदन
- धूप, दीपक, फल और नैवेद्य
- मां दुर्गा का चित्र या प्रतिमा
कुछ परिवारों में पात्र का ढक्कन, इत्र और अन्य पूजन सामग्री भी रखी जाती है।
सामग्री में अंतर होना स्वाभाविक है। स्थानीय रीति और पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।
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घर में घटस्थापना कैसे करें? सरल चरणबद्ध विधि
चरण 1: पूजा स्थान तैयार करें
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर के शांत और स्वच्छ स्थान को पूजा के लिए तैयार करें। एक चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा का चित्र या प्रतिमा रखें।
पूजा की सामग्री ऐसी जगह रखें जहां सभी लोग सुरक्षित रूप से पूजा कर सकें।
चरण 2: जौ या सप्तधान्य बोएं
एक चौड़े मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी की परत बिछाएं।
उसमें जौ अथवा परंपरा के अनुसार सप्तधान्य डालें। ऊपर से मिट्टी की हल्की परत लगाएं और थोड़ी मात्रा में जल छिड़कें।
ध्यान रखें कि मिट्टी नम रहे, लेकिन उसमें पानी जमा न हो।
नवरात्रि के दौरान अंकुरित होने वाले जौ को कई क्षेत्रों में जवारे भी कहा जाता है।
चरण 3: कलश तैयार करें
कलश को स्वच्छ जल से धो लें।
उसके गले में मौली बांधें और उसमें स्वच्छ जल या गंगाजल भरें।
परंपरा के अनुसार जल में सुपारी, अक्षत, दुर्वा, सिक्का आदि रखे जा सकते हैं।
चरण 4: पत्ते और नारियल स्थापित करें
कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच पत्ते व्यवस्थित करें।
कलश पर ढक्कन रखकर उसमें अक्षत रखने की परंपरा भी प्रचलित है।
अब जटा वाले साबुत नारियल को लाल वस्त्र में लपेटें और मौली से बांधें।
नारियल को तैयार कलश के ऊपर स्थिरता से रखें। ध्यान दें कि वह गिरने की स्थिति में न हो।
चरण 5: कलश को स्थापित करें
तैयार कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें।
इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कलश पूजन आरंभ करें।
चरण 6: संकल्प और देवी का आह्वान करें
संकल्प का उद्देश्य अपनी पूजा का भाव स्पष्ट करना है।
आप सरल हिंदी में इस प्रकार प्रार्थना कर सकते हैं:
“हे मां दुर्गा! मैं श्रद्धापूर्वक नवरात्रि की पूजा आरंभ कर रहा/रही हूं। मेरे परिवार और समस्त प्राणियों के जीवन में सद्बुद्धि, शांति, करुणा और कल्याण बना रहे। मेरी पूजा स्वीकार करें।”
यह सरल भावार्थ-आधारित प्रार्थना है, कोई अनिवार्य वैदिक संकल्प मंत्र नहीं।
चरण 7: पंचोपचार पूजा करें
कलश और देवी के समक्ष दीपक, धूप, पुष्प, सुगंध तथा नैवेद्य अर्पित करें।
इसके बाद मां दुर्गा का मंत्रजप या आरती कर सकते हैं।
एक प्रचलित देवी मंत्र है:
ॐ दुं दुर्गायै नमः।
पूजा के बाद परिवार सहित देवी से मंगल और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
घटस्थापना के जरूरी नियम
1. प्रतिपदा के उपयुक्त मुहूर्त का ध्यान रखें
घटस्थापना सामान्यतः प्रतिपदा तिथि के प्रातःकाल में की जाती है। स्थानीय पंचांग के निर्धारित समय को प्राथमिकता दें।
2. स्वच्छ और स्थिर स्थान चुनें
पूजा स्थान स्वच्छ होना चाहिए। कलश ऐसी जगह रखें जहां अनजाने में धक्का लगने या गिरने का खतरा न हो।
3. पूजा सामग्री की स्वच्छता बनाए रखें
स्वच्छ जल, साफ पात्र, ताजे पुष्प और अच्छी स्थिति में मौजूद नारियल का प्रयोग करें।
4. नियमित पूजा करें
कलश स्थापना के बाद प्रतिदिन अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार पूजा, आरती अथवा देवी मंत्रों का जप किया जा सकता है।
5. जौ में संतुलित मात्रा में जल दें
जौ बोए हैं तो मिट्टी को हल्का नम रखें। अधिक पानी देने से फफूंदी या सड़न हो सकती है।
6. दीपक जलाते समय सुरक्षा रखें
यदि अखंड ज्योति की परंपरा निभाते हैं, तो दीपक को ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें और उचित निगरानी सुनिश्चित करें। घर में लगातार जलता दीपक रखना सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।
7. सात्त्विक आचरण को महत्व दें
नवरात्रि में संयम, स्वच्छता, मधुर वाणी, सेवा और सकारात्मक व्यवहार को विशेष महत्व दिया जाता है।
धार्मिक नियमों के साथ इन गुणों को अपनाना भी उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
घटस्थापना में होने वाली सामान्य गलतियां
गलती 1: किसी दूसरे शहर के मुहूर्त को अपना मुहूर्त मान लेना।
स्थानीय सूर्योदय बदलने से पूजा का समय भी बदल सकता है।
गलती 2: पूजा से पहले जरूरी सामग्री न जुटाना।
पूजा शुरू करने के बाद बार-बार सामग्री खोजने से असुविधा होती है। एक दिन पहले तैयारी करना उपयोगी है।
गलती 3: जौ में आवश्यकता से अधिक जल देना।
मिट्टी नम रखने भर से काम चल सकता है। जलभराव अंकुरण को प्रभावित कर सकता है।
गलती 4: दीपक को असुरक्षित स्थान पर रखना।
कलश के आसपास कपड़े और फूल होते हैं। दीपक को सुरक्षित दूरी पर रखना आवश्यक है।
गलती 5: अलग-अलग पारिवारिक परंपराओं को गलत मान लेना।
पूजन विधि में क्षेत्रीय अंतर होते हैं। हर परिवार में जौ बोना, कलश सजाना और पूजा समाप्त करना बिल्कुल एक जैसा नहीं होता।
घटस्थापना के बाद नौ दिनों तक क्या करें?
कलश स्थापना के बाद नियमित रूप से पूजा स्थान की सफाई करें।
जौ बोए हैं तो उनकी स्थिति देखें। प्रतिदिन देवी के सामने पुष्प, आरती, मंत्रजप या अपनी परंपरा के अनुसार नैवेद्य अर्पित कर सकते हैं।
पूजा केवल लंबी विधियों पर निर्भर नहीं करती। यदि किसी दिन विस्तृत पाठ संभव नहीं है, तो अपनी क्षमता के अनुसार संक्षिप्त देवी स्मरण भी किया जा सकता है।
नवरात्रि में कलश का विसर्जन कब और कैसे करें?
कलश विसर्जन का समय और तरीका अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं में बदल सकता है।
2026 में विजयादशमी 20 अक्टूबर को है और इसी अवसर पर अनेक परिवार दुर्गा विसर्जन तथा पूजा के समापन की परंपरा निभाते हैं।
कुछ परिवार महानवमी पर हवन और पूजन के बाद कलश का विधिपूर्वक समापन करते हैं।
कलश के जल को साफ पौधों की मिट्टी में अर्पित किया जा सकता है, जहां पारिवारिक परंपरा इसकी अनुमति देती हो। पूजा की प्राकृतिक सामग्री का निपटान पर्यावरण का ध्यान रखते हुए करें।
यदि घर में विशेष संकल्प या कुलपरंपरा से पूजा की गई है, तो उसी के अनुसार विसर्जन विधि अपनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घटस्थापना में कितने पत्ते रखने चाहिए?
एक प्रचलित विधि में आम या अशोक के पांच पत्तों का प्रयोग किया जाता है। क्षेत्रीय परंपराओं में अंतर संभव है।
कलश में क्या-क्या डालना चाहिए?
स्वच्छ जल के साथ सुपारी, अक्षत, दुर्वा और सिक्का आदि रखने की परंपरा है।
क्या घटस्थापना में जौ बोना जरूरी है?
जौ या सप्तधान्य बोना घटस्थापना की प्रमुख परंपराओं में से एक है, लेकिन सभी परिवारों में विधि एक समान नहीं होती।
क्या बिना कलश स्थापना के नवरात्रि पूजा कर सकते हैं?
हां। जो परिवार घटस्थापना नहीं कर पाते, वे भी अपनी मान्यता के अनुसार देवी दुर्गा का ध्यान, आरती, भजन और पूजा कर सकते हैं।
नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना किस दिन है?
रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को।
घटस्थापना की परंपरा हमें क्या सिखाती है?
जब हम एक पात्र में मिट्टी रखते हैं, उसमें बीज बोते हैं और कलश में जल भरते हैं, तो यह अनुष्ठान जीवन के आवश्यक तत्वों के प्रति सम्मान का भाव भी जगाता है।
मिट्टी हमें अपनी जड़ों से जुड़ने की याद दिलाती है। जल जीवन की आवश्यकता का स्मरण कराता है और अंकुरित होते बीज धैर्य तथा निरंतर विकास का प्रतीक बनते हैं।
इस नवरात्रि घटस्थापना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न रहे, बल्कि अपने जीवन में स्वच्छता, अनुशासन, सेवा और सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत भी बने।
मां दुर्गा सभी के जीवन में सुख, शांति और सद्बुद्धि का संचार करें।
जय माता दी!
Hamari Virasat — अपनी परंपराओं को जानें, उनका अर्थ समझें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।
डिसक्लेमर
‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। ‘
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