महाशिवरात्रि पूजा(Maha Shivaratri ) और सावन शिवरात्रि (Sawan Shivaratri)

फाल्गुन महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि व्रत किया जाता है और सावन शिवरात्रि(sawan shivaratri) हर साल सावन के महीने की कृष्‍ण पक्ष चतुर्दशी को आती है . चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं। इसलिए हर महीने कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भी शिवरात्रि व्रत किया जाता है जिसे मास शिवरात्रि व्रत कहा जाता है।इसी दिन माता पार्वती तथा भगवान शिव का विवाह हुआ था। इस तरह सालभर में 12 शिवरात्रि व्रत किए जाते हैं लेकिन इनमें फाल्गुन महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी बहुत खास है। यानी फरवरी या मार्च में आने वाली इस तिथि को महाशिवरात्रि के रुप में मनाया जाता है। इस बार सावन शिवरात्रि 30 जुलाई को है.  इस पर पूरे दिन व्रत किया जाता है और मध्यरात्रि में शिवजी की पूजा की जाती है।

महाशिवरात्रि कब है:-

इस वर्ष शिवरात्रि(Maha Shivaratri 2019) का पावन पर्व श्रवण नक्षत्र में पड़ रहा है। श्रवण का स्वामी चंद्रमा होता है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी है। चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित होते हैं। इस दिन सोमवार भी है। इस प्रकार यह तीन महासंयोग अद्भुत है जो कि बहुत ही मुश्किल से मिलता है। इस प्रकार इस वर्ष यह महापर्व बहुत ही शुभकारी और मंगलकारी है।

महाशिवरात्रि व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत को अर्धरात्रिव्यापिनी चतुर्दशी तिथि में करना चाहिए। सोमवार 4 मार्च को दोपहर 4 बजकर 11 मिनट से चतुर्दशी तिथि लग रही है जो कि मंगलवार 5 मार्च को शाम 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। अर्धरात्रिव्यापिनी ग्राह्य होने से यानी मध्यरात्रि और  चतुर्दशी तिथि के योग में 4 मार्च को ही महाशिवरात्रि मनायी जाएगी।

Maha Shivratri 2019: शुभ मुहूर्त एवं विधि, व्रत  के लिए समय, व्रत खोलने के लिए समय :-

चतुर्दशी तिथि शुरू: 4 मार्च 2019 को शाम : 04:28
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 5 मार्च, 2019 को शाम: 07 :07 बजे

निशिता काल पूजा का समय = 12:08 am से दोपहर 12 :57 am बजे (5 मार्च 2019):-Duration = 0 Hours 49 Mins

प्रथम प्रहर पूजा का समय (रात): 06:19 बजे से 09:26 बजे (4 मार्च को)
द्वितीय प्रहर पूजा का समय (रात): 09:26 से 12:33 बजे तक
तृतीय प्रहर पूजा का समय (रात): 12:33 पूर्वाह्न से 03:39 तक
रात्रि चौथा प्रहर पूजा समय: प्रातः 03:39 से प्रातः 06:46 तक

आपका उपवास तोड़ने का समय: प्रातः 06:58 से अपराह्न 3:45 बजे (5 मार्च को)

Sawan Shivratri 2019: सावन शिवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त  व्रत  के लिए समय, व्रत खोलने के लिए समय :-

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 30 जुलाई 2019 को दोपहर 02 बजकर 49 मिनट से
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 31 जुलाई 2018 को सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक
निशिथ काल पूजा: 31 जुलाई 2019 को दोपहर 12 बजर 06 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक
पारण का समय: 31 जुलाई 2019 को सुबह 05 बजकर 46 मिनट से सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक

महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि  में कैसे करें भगवान शिव का रुद्राभिषेक:-

शिवरात्रि को भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।परमपिता को प्रसन्न करने तथा मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए रुद्राभिषेक बहुत ही आवश्यक है।

1- गाय के दुग्ध से रुद्राभिषेक करने से संपन्नता आती है तथा मन में की गई मनोकामना पूर्ण होती है।
2- जो लोग रोग से पीड़ित हैं तथा प्रायः अस्वस्थ रहते हैं या किसी गंभीर महा बीमारी से परेशान हैं उनको कुशोदक से रुद्राभिषेक करना चाहिए। कुश को पीसकर गंगा जल में मिला लीजिए फिर भगवान शिव का नियम तथा श्रद्धा पूर्वक रुद्राभिषेक करें।
3- धन प्राप्ति के लिए देसी घी से रुद्राभिषेक करें।
4- निर्विध्न रूप से किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए तीर्थ स्थान के नदियों के जल से रुद्राभिषेक करें। इससे भक्ति भी प्राप्त होती है।
5- गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करने से कार्य बाधाएं समाप्त होती हैं तथा वैभव और सम्पन्नता में वृद्धि होती है।
6- शहद से रुद्राभिषेक करने से जीवन के दुख समाप्त होते हैं तथा खुशियां आती हैं।
7- किसी शिव मंदिर में शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करें या घर पर ही पार्थिव का शिवलिंग बनाकर रुद्राभिषेक करें।

महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि  को करें महामृत्युंजय मंत्र का जप –

इस दिन महामृत्युंजय मंत्र के जप से रोगों से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति दीर्घायु होता है।गंभीर रोग से पीड़ित लोग निश्चित संख्या मवन शिवमंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान बैठाएं।

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ।।

tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ pushtivardhanam ǀ
urvārukamiva bandhanān mrityormukshīya mā’mratāt ǁ

इस प्रकार महाशिवरात्रि को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बनाएं।निर्मल मन से की गई पूजा पर भगवान शिव मनोवांछित फलों को प्रदान करते हैं।

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महा शिवरात्रि और सावन शिवरात्रि  के दौरान शिव पूजा का महत्व:

भगवान शिव हिंदू देवता और हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं में से एक हैं। वह पूर्णता, योग, ध्यान, आनंद और आध्यात्मिकता का केंद्र है। प्राचीन वैदिक काल में, प्रसिद्ध संतों (ब्राह्मणों) ने मोक्ष के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद मांगा, समर्थ योद्धाओं (क्षत्रियों) ने उनसे सम्मान, शक्ति और बहादुरी के लिए प्रार्थना की, व्यापारियों और व्यापारियों (वैश्य) ने उन्हें धन और लाभ के लिए पूजा की। वर्ग (शूद्रों) ने दैनिक रोटी और मकान के लिए उनकी पूजा की। भगवान दोनों प्रकार के भक्तों के लिए अभयारण्य है, जो धन और सांसारिक सुखों की तलाश करते हैं और जो दुनिया के दुखों से मुक्ति चाहते हैं।

महाशिवरात्रि या सावन शिवरात्रि  पर शिवलिंग अभिषेक का महत्व:-

शिवलिंग आध्यात्मिक आराधना की पूजा का अनुष्ठान आध्यात्मिक ध्यान
शिव लिंग को जल, दूध और शहद से स्नान कराएं और बेल के पत्ते अर्पित करें आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करता है
स्नान करने के बाद शिव लिंग पर चंदन लगाएं। दिव्य सुगंध के साथ अपने आप को शुद्ध करना और भरना
फल का चढ़ावा। इच्छाओं की दीर्घायु और संतुष्टि का प्रतिनिधित्व करता है।
धूप जलाना उच्चतर इंद्रियों का समर्पण।
दीपक का प्रकाश ज्ञान की प्राप्ति
पान का पत्ता सांसारिक सुखों से संतुष्टि का प्रतिनिधित्व करता है
माथे पे और शिवलिंग पर त्रिपुंड्र लगाना (पवित्र राख की तीन क्षैतिज पट्टियों)। आध्यात्मिक ज्ञान, पवित्रता और तपस्या का प्रतिनिधित्व करता है। (यह भगवान शिव की तीन आंखों का प्रतीक भी है)

 

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