बगलामुखी चालीसा (Baglamukhi Chalia)
यहाँ माँ बगलामुखी चालीसा (baglamukhi mata)का पाठ दिया गया है। माँ बगलामुखी दसों महाविद्याओं में से एक हैं, जिन्हें शत्रुओं का नाश करने और वाक-शक्ति (वाणी) पर विजय प्राप्त करने वाली देवी माना जाता है।
॥ श्री बगलामुखी चालीसा ॥
॥ दोहा ॥ नमो महाविद्या बगला, जय जय शत्रु विनाश। भक्त जनन के कष्ट सब, मेटहुँ विमल प्रकाश॥ पीताम्बर धारी नमो, गदा हस्त सोहन्त। जीभ शत्रु की कीलती, जय जय जय हनुमन्त॥
॥ चौपाई ॥ जय जय जय बगला महरानी। नमो नमो जगदम्ब भवानी॥ दश विद्या में तुम हो माता। दुःख दरिद्र की तुम ही त्राता॥ ब्रह्मास्त्र विद्या तव नामा। सिद्ध करे सब पूरण कामा॥ पीत वरण पीताम्बर सोहै। देखि भक्त मन पावन होहै॥
सौम्य रूप धरि कल्याणी। शत्रु नाशिनी तुम महारानी॥ जो सुमरै तुमको मन लाई। ताके रिपु सब जाहिं नसाई॥ स्तम्भन शक्ति तुही में माता। तुम ही सब सुख सम्पति दाता॥ जीभ पकड़ शत्रु की कीलो। बुद्धि भ्रमित करि गर्वा ढीलो॥
परशु गदा और पाश विराजै। मुदगर देखि काल भी भाजै॥ ब्रह्मा विष्णु महेश रिझावैं। तुमको नित उठि शीश नवावैं॥ पाण्डव दल की तुम ही सहाई। कौरव सेना दीन्हि नसाई॥ शत्रु दमन तुम कीन्हो भारी। जय जय जय बगला भयहारी॥
जो नर पढ़ै भक्ति कर तेरी। ताके दुख हरहु तुम बेरी॥ कारागार बन्ध जो होई। तुमको सुमरै छूटै सोई॥ भूत प्रेत अरु डाकिनि भागै। तव सुमिरन सों पातक त्यागै॥ राज द्वार में विजय दिलावैं। कोर्ट कचहरी जीत करावैं॥
विद्या बुद्धि बढ़ावन हारी। जय जय जय बगला बलकारी॥ पीत पुष्प और पीत फल अर्पण। करे भक्त जो तव पद तर्पण॥ पीत वस्त्र अरु पीत ही माला। तुमको भावै हे प्रतिपाला॥ हल्दी की माला पर ध्यावैं। निश्चय ही मनवांछित पावैं॥
तुम ही अम्बे तुम ही तारा। तुम ही जग का रूप सुधारा॥ धूम्रावती मात तुम जानो। मातंगी शिव रूप बखानो॥ भैरवी तुम अरु तुम ही काली। छिन्नमस्तिका तुम बलशाली॥ षोडशी कमला तुम ही माता। भुवनेश्वरी सब जग की त्राता॥
शरण तुम्हारी जो भी आवै। जन्म मरण सों मुक्ति पावै॥ नमो नमो बगला वरदानी। नमो नमो कलि कल्प भवानी॥ रक्षा करो मात अब मेरी। विनती सुनहु दास की देरी॥ शत्रु नाश करि सुख उपजाओ। बगला मात दया दिखलाओ॥
॥ दोहा ॥ बगलामुखी की भक्ति करि, जो नर चालीसा पढ़न्त। शत्रु नाश सब दुःख टरै, पावै सुख अनन्त॥ मंगल होवै जगत में, मेटै सब जंजाल। बगला की जो शरण है, सोई होत निहाल॥
पाठ की विधि:
- माँ बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है।
- संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करके और पीले आसन पर बैठकर पाठ करें।
- पूजा में पीले फूल और हल्दी की गांठ अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- शत्रु बाधा निवारण के लिए इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।
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