जिसके हाथो मेरी सारी व्यवस्था

हम इंसान जब टूट जाते हैं टूट के बिखर जाते हैं तो हमें किसी और का सहारा नहीं होता हमें सिर्फ ईश्वर का सहारा होता हम उस ईश्वर को ही अपना मानते हैं। और सारे सवालों के जवाब उनसे ही मांगते हैं। न जाने कभी-कभी ऐसा क्यों लगता है जैसे सब कुछ खत्म सा हो गया है न जाने कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे कि ईश्वर हमारी सुनता नहीं।
ईश्वर हमारी सुन नहीं रहा तो उस अवस्था में हमारे दिल से दो शब्द निकलते हैं दिल से जो दो शब्द निकलते वही ईश्वर तक पहुंचते हैं वही भगवान तक पहुंचते हैं। एक बात हमेशा याद रखें दिल से निकली बातें ही उस परमात्मा तक पहुंचती हैं यूं तो शब्द बहुत लोग कहते हैं लेकिन शब्दों में उनके ही जान होती है जो शब्द दिल से निकले होते हैं।

आपके ही हाथो मेरी सारी व्यवस्था ,

क्या आप ही नही जानते मेरी अवस्था 😞

हमारी विरासत

अंधकार से प्रकाश की ओर का सफर 

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