क्यों गीता का उपदेश दिया गया और क्यों ये दिन गीता जयंती के नाम से जाना जाता है ? - हमारी विरासत
क्यों गीता का उपदेश दिया गया और क्यों ये दिन गीता जयंती के नाम से जाना जाता है ?

क्यों गीता का उपदेश दिया गया और क्यों ये दिन गीता जयंती के नाम से जाना जाता है ?

जब अपने ही अपनों के विरोध हो गए जब धर्म का मोल खत्म होने लगा। जहां अधर्म अपने चरम सीमा को पार करने की कोशिश कर रहा था। और यह सब देखते हुए भी अर्जुन असमर्थ हो रहा था कि वह कैसे अपनों के विरुद्ध जाकर धर्म की स्थापना करें। श्री कृष्णा अर्जुन के सामने खड़े होकर अर्जुन की सारी भावनाओ को पढ़ रहे थे।

क्योंकि यह वह युद्ध था जो आज हम सभी लड़ते हैं हमारे जीवन में भी ऐसा मोड़ आता है जब हमारे अपने हमारे ही विरुद्ध खड़े हो जाते हैं। उसी तरीके से अर्जुन के जीवन में भी ऐसा पल आया जब जहां धर्म युद्ध में सामने सभी अपने खड़े थे और उसे उनके खिलाफ युद्ध करनी थी। वह पल जहां अर्जुन असमर्थ होकर टूटकर श्री कृष्ण के चरणों में गिर गए।

तब उन्होंने श्री कृष्ण से पूछा यह धर्म है अपनों को मारकर अपनों को कष्ट पंहुचा कर युद्ध जीता जाये। मैं ऐसे युद्ध नहीं जीतना चाहता जहां मैं अपने ही हाथो से अपनों को ही मौत के घाट उतार दू। अर्जुन ने हारकर श्री कृष्णा की शरण ली। और आज ही का वो दिन था जब श्री कृष्णा ने गीता का उपदेश दिया। और अर्जुन को उस धर्म संकट से निकला और पृथ्वी पे फिर से धर्म की स्थापना की। जिसे हम सभी गीता जयंती(Geeta Jayanti) के रूप में मानते है।

गीता जयंती (Geeta Jayanti)

क्या है गीता जयंती ?

जिस तरीके से हम अपना जन्म उत्सव मनाते है जिस दिन हमारा जन्म हुआ हो। उसी तरीके से आज ही के दिन श्री कृष्णा ने अर्जुन को युद्ध क्षेत्र (धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र) में गीता का उपदेश दिया था। आज ही गीता जैसी ग्रंथ का श्री कृष्ण के मुख से प्रवाह हुआ था। इसलिए आज का दिन गीत जयंती के नाम से जाना जाता है।

कब है गीता जयंती?

8 दिसंबर रविवार 2019 को मोक्षदा एकादशी है। द्वापर युग में अगहन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता उपदेश दिया था। इस बार 8 दिसंबर को गीता जयंती है और मोक्षदा एकादशी भी है।

  • कहते है महाभारत युद्ध की शुरूआत में अर्जुन ने रख दिए थे शस्त्र। तब श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया और अर्जुन को कर्मों का महत्व बताया था। की कर्म कितना महान होता है हमे कर्म से कभी मुँह नहीं फेरनी चाहिए।
  • गीता में सभी परेशानियों का हल छुपा हुआ है।
  • गीता का दूसरा नाम गीतोपनिषद है।
  • गीता जयंती के दिन शंख का पूजन करना चाहिए। शंख बजाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
  • गीता जयंती के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से सही निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।

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