वृन्दावन की होली प्रेम की होली

वृन्दावन की होली प्रेम की होली होती है जंहा श्री कृष्णा ने राधा संग और गोपियों सखा संग रंग गुलालों की होली खेली। कहते है गुलालों के रंगो से और उसकी खुशबु से पुरे मथुरा वृन्दावन को हमेशा हमेशा के लिए खुशियों से भर दिया। मथुरा और वृन्दावन में होली का त्यौहार बहुत प्रसिद्ध है। इस दिन को उत्साह से मनाने के लिए लोग भारत के अन्य शहरों से इस दिन मथुरा और वृन्दावन आते हैं। मथुरा और वृन्दावन वो पवित्र स्थान हैं जहाँ भगवान् श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। इतिहस के अनुसार होली का त्यौहार राधा कृष्ण के समय से मनाया जा रहा है।

भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा, वृंदावन में रविवार से ही होली का सुरूर चढ़ हुआ है। पूरे क्षेत्र में स्थित मंदिरों में रंगों और प्रार्थनाओं का दौर जारी है। वृंदावन के मंदिरों में जोर-शोर से गुलाल उड़ रहे हैं। मूर्तियों पर फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा हो रही है। होली समारोह का मुख्य स्थल बाके बिहारी मंदिर बना हुआ है।

आखिर मथुरा-वृन्दावन की होली इतनी लोकप्रिय क्यों है?

वृन्दावन की होली प्रेम की होली होती है जंहा श्री कृष्णा ने राधा संग और गोपियों सखा संग रंग गुलालों की होली खेली। कहते है गुलालों के रंगो से और उसकी खुशबु से पुरे मथुरा वृन्दावन को हमेशा हमेशा के लिए खुशियों से भर दिया।
आज करोड़ लोगो की खुशियों से सरावोर करती देती है वृन्दावन की होली। यहाँ न जाने कहा कहा से नहीं भक्त आते है। अगर कोई कृष्णा के प्रेम रंग में रंगा हो या न रंगा हो पर यंहा आकर वो राधे कृष्णा के प्रेम(भक्ति ) के रंग में जरूर रंग जाता है।

बरसाना की लठ मार होली

ब्रज के बरसाना गाँव में होली एक अलग तरह से खेली जाती है जिसे लठमार होली कहते हैं। ब्रज में वैसे भी होली ख़ास मस्ती भरी होती है क्योंकि इसे कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है।

नन्दगाँव कि होली :-

यहाँ की होली में मुख्यतः नंदगाँव के पुरूष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं, क्योंकि कृष्ण नंदगाँव के थे और राधा बरसाने की थीं। नंदगाँव की टोलियाँ जब पिचकारियाँ लिए बरसाना पहुँचती हैं तो उनपर बरसाने की महिलाएँ खूब लाठियाँ बरसाती हैं। पुरुषों को इन लाठियों से बचना होता है और साथ ही महिलाओं को रंगों से भिगोना होता है।

मथुरा कि होली :-

भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ और उनका लालन पालन वृन्दाबन में हुआ था। यहां होली के चालीस दिन पहले से ही होली की शुरुआत कर दी जाती है।

वृन्दावन :-

वृन्दावन के श्री कृष्ण जन्मस्थान और बांके बिहारी मंदिर में होली का भव्य आयोजन होता है जिसे देखने पूरी दुनिया से पर्यटक आते हैं।

विधवाओं की होली मथुरा में होली के रंग में रंगी उन बंगाली विधवाएं की जिन्होंने समाज को ये बताया कि औरों की तरह इन्हें भी खुशियां मनाने और अपनी भावनाओं को प्रकट करने का अधिकार है। हर साल विधवाएं पागल बाब मंदिर में होली के रंगो में सराबोर हो जाती है..

होली 2018 को शाम को शुरुआत होगी
गुरुवार, 1 मार्च 2018
और
शुक्रवार, 2 मार्च शाम को समाप्त होता है

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