मन से भागना छोड़ दे

हम सभी के पास गिने चुने दिन मिलते है

ये जानकर भी हम कभी भी परम सच से नहीं मिलते है

आज हम सभी क्यों परेशान है और इतना मन से भटकाब क्यों है  इसका जवाब हम सभी जानते है बस मानना नहीं चाहते बस इसी कारन हम बार बार जहा से शुरू करते है वही पहुंच जाते है। सच तो यही है हम सभी के पास गिने चुने समय है उसी समय में हमे जो काम मिला है वो करना होता है और जब समय ख़त्म होता है तो फिर लौट कर उस ईश्वर के घर सबको ही जाना है।

जिस काल में हम सब जी रहे है वो कलिकाल है  जिस काल में अधिकतर लोग सब कुछ पा कर भी दुखी और जिसने कुछ नहीं पाया वो भी दुखी है। दुःख को भी आप छोड़ दीजिये तनाब (tension) चुकी है हम सभी का अब तो ये हाल है कुछ न भी हो तो हम आने वाले कल को लेकर चिंता करने लग जाते है , वो कल जिसे  किसी ने नहीं देखा।

क्या आप जानते है आपकी सोच ही आपका कल बनती है?

चिंता की सबसे बड़ी वजय  आपकी नकरात्मक सोच (Negative thinking)  है आप खुद ही सोच जब आप positive सोचेंगे सब अच्छा होगा और अच्छा होना ही होगा अगर मैं न कर सका तो वो भगवन मेरी मदद जरूर करेगा।  तो इस कंडीशन में क्या आप को चिंता होगी नहीं होगी।  चिंता तो फिर उन भगवान जी की बढ़ जाएगी। इसकी सारी उमीदें मुझसे है मुझे कुछ तो करना पड़ेगा इसके लिए।

लेकिन दूसरे तरफ जब आप नेगेटिव सोचते है तो वो सारी मुसीबतो को आप खुद अपने ऊपर आने के लिए बुला रहे है अपनी तरफ खींच रहे है और धीरे धीरे  वो आपकी हंसी झीन लेती है और आपको तनाब(tenstion) चिंता में डाल देती है

इनसे बचे कैसे या हमेशा के लिए दूर कैसे करे ?

  1. लालच को खुद स दूर करे जो मिला है उसमे खुश रहे इसका ये मतलब नहीं की आप मेहनत करना बंद कर दे। आपकी मेहनत ही आपको उन सभी चीज़ो से मिलवाएगी जो आप चाहते है।
  2. दुनिया से डरना छोड़ दीजिये ये डर ही हार की और चिंता की सबसे बड़ी वजय है। तुम्हे डर हो भी तो बस उस भगवान का हो क्युकी उससे ऊपर कोई नहीं है। डरना तो हमेशा इस बात से की तुम्हारे हाथो कोई गलत काम न हो जाये।
  3. ये मत सोचिए ऐसा होगा तो क्या होगा ऐसा नहीं होगा तो क्या होगा क्यूंकि ये सोच आपको कमज़ोर बनाती है हैं कोई काम करने से पहले एक बुद्धिमान इंसान की तरह जरूर  सोचे।

हमारी संस्कृति और हमारे संत क्या कहते है ?

जीवन में हर काम को करते हुए भी साथ में उस भगवन को लेकर चलो हर काम में उनको सामने खड़ा रखो। वो कहते है जब तुम्हारा काम पूरा नहीं होता या इच्छा पूरी नहीं होती तब तुम्हारे विचारो और मन की बराबरी नहीं बैठती उस समय तुम्हे चिंता होने लगती है। चिंता को काम करना है तो उस भगवन पे तुम विश्वास करना शुरू कर दो उनसे प्यार करना शुरू कर दो।

तो आपको धीरे-२ इस बात पे यकीन हो जायेगा जो होना है वो होगा इसके लिए चिंतित होने की जरूरत नहीं उस वक़्त सोचे मुझे जो करना है वो करना है ये पल भी बहुत जल्द निकल जायेगा।

भगवान की शरणागति आपको ताकतबर बनाती है।

हम सभी उस भगवान के चरणों से आये है और जब जब हम उनकी चरणों से दूर होंगे हम अशांत होंगे

एक मछली, युवा बच्चे और उस संत की कहानी सच्ची कहानी ?

एक बार एक युवा संत के पास गया और उसने बड़े ही प्यार से पूछा मेरे पास सब कुछ है मैं मेहनती भी मेरे जीवन में कोई कमी भी नहीं फिर न जाने क्यों मेरा मन बहुत अशांत रहता है ?में कभी कभी अपनी मंज़िल से भटक भी जाता हूँ मैं क्या करू कुछ समझ भी नहीं आता?

संत ने उस युवा से कहा सामने जो नदी है उसमे से तुम एक मछली को उठ कर इस रेत पे रखो तब तक में स्नान करके अत हूँ। उस युवा ने ऐसा ही किया उस मछली को पानी में से निकल कर रेत पे रख दिया। तब थोड़ी देर बाद वो देखता है वो युवा मछली बहुत बुरी तरीके से झटपटा रही है तरप रही है उसे वो देखा नहीं जा रहा था उसे डर था कहीं मर न जाये। उसी वक़्त संत वापस आते है और पूछते है क्या हुआ तुमने क्या देखा ? फिर वो युवा कहता है ये मछली बहुत झटपटा रही थी बेचैन थी
बस इतना सुनना था संत हंस पड़े कहा इसे पहले वही छोड़ कर आओ उसने ऐसा हे किया। फिर देखा मछली खुश हो गयी।

संत ने उस युवा से कहा इसी तरह से हम सभी उस परमात्मा के घर से आये है जब जब हम सभी उसकी चरणों से दूर होंगे हम इसी मछली की तरह से

झटपटा रहेंगे। संसार का कार्य करो सब रिश्ते भी निभाओ पर याद रखना लौट कर उसके पास ही जाना है।

हम सभी उस परमात्मा की चरणों से जब जब दूर चले जाते है तब तक मन अशांत हो जाता है हम भटक जाते है और जब हमसभी काम करते हुए उसके

चरणों को नहीं भुलाते तो हमारा मन संसार में भी शांत होगा और परमात्मा की चरणों में भी भक्ति बढ़ेगी।

 

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