बसंत पंचमी (Saraswati Puja 2019):

माँ अपनी है एक बार मना कर तो देखो मान जाएँगी
और आशीर्वाद देकर अज्ञानता को हमेशा के लिए दूर कर जाएँगी

इस दिन बन रहा बेहद शुभ संयोग माघ माहीने की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी-सरस्वती पूजा(Saraswati Puja 2019) के रूप में मनाया जाता है शास्त्रों में माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी कहा गया है। इस दिन सरस्वती पूजन का विधान है। इस साल बसंत पंचमी की तिथि को लेकर उलझन की स्थिति है। दरअसल पंचमी तिथि 2 दिन लग रही है। देश के कुछ भागों में चतुर्थी तिथि 9 तारीख को दोपहर से पहले ही समाप्त हो जा रही है और पंचमी तिथि शुरू हो रही है और 10 तारीख को पंचमी तिथि 2 बजकर 8 मिनट तक है। ऐसे में सरस्वती पूजन किस दिन करना शुभ रहेगा जानिए क्या कहते हैं शास्त्र।

10 फरवरी को सरस्वती पूजन का शुभ समय 

saraswati mata

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था इसलिए इसे देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है।

मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी कहा जाता है:-

हिंदू धर्म में मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी माना गया है। वे छात्र जो पढ़ाई लिखाई में कमजोर हैं अगर बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करें तो उन पर विशेष कृपा होती है। छात्र इस दिन अपनी किताब-कॉपी और कलम की भी पूजा करते हैं।

इस दिन कई लोग अपने शिशुओं को पहला अक्षार लिखना सिखाते हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस दिन को लिखने पढ़ने का सबसे उत्‍तम दिन माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करना अनिवार्य है। इस दौरान सरस्वती स्तोत्रम का पाठ किया जाता है। अब आइये जानते हैं बसंत पंचमी

  • बसंत पंचमी पूजा मुहूर्त: सुबह 6.40 बजे से दोपहर 12.12 बजे तक
  • पंचमी तिथि प्रारंभ: मघ शुक्ल पंचमी शनिवार 9 फरवरी की दोपहर 12.25 बजे से शुरू

पंचमी तिथि समाप्त: रविवार 10 फरवरी को दोपहर 2.08 बजे तक

ज्ञान और आत्मिक शांति:-

देवी सरस्वती ज्ञान और आत्मिक शांति की प्रतीक हैं। इनकी प्रसन्नता के लिए पूजा में सफेद और पीले रंग के फूलों और वस्त्रों का प्रयोग करना चाहिए। देवी सरस्वती को प्रसाद स्वरूप बूंदी, बेर, चूरमा, चावल का खीर भोग लगाना चाहिए। इस दिन से बसंत का आगमन हो जाता है इसलिए देवी को गुलाब अर्पित करना चाहिए और गुलाल से एक-दूसरे को टीका लगाना चाहिए।

पीले रंग का है खास महत्व :-

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व है। दरअसल, वसंत ऋतु में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नजर आती है। इसे ध्यान में रखकर इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनकर बसंत पंचमी का स्वागत करते हैं। इस द‍िन सूर्य उत्तरायण होता है, जो यह संदेश देता है कि हमें सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए। बसंत पंचमी के दिन सिर्फ कपड़े ही नहीं बल्कि खाने में भी पीले रंग की चीजें बनायी जाती हैं।

इस दिन क्यों की जाती है सरस्वती माता की पूजा, जानें:-

बसंत पंचमी(Basant Panchami) के दिन मां सरस्वती की पूजा विधि विधान से की जाती है, मां सरस्वती, ज्ञान-विज्ञान, कला, संगीत और शिल्प की देवी हैं अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए और जीवन में नया उत्साह प्राप्त करने के लिए, बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की उपासना पूरे देश में की जाती है, स्कूलों में सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है. मां सरस्वती देवी ने जीवों को वाणी के साथ-साथ विद्या और बुद्धि भी दी। इसलिए बसंत पंचमी के दिन हर घर में सरस्वती की पूजा भी की जाती है।

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती पृथ्वी पर प्रगट हुई थीं। माता सरस्वती ने पृथ्वी पर उदासी को खत्म कर सभी जीव-जंतुओं को वाणी दी थी। इसलिए माता सरस्वती को ज्ञान-विज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि की देवी भी माना जाता है। उन्हीं के जन्म पर वसंत पचंमी का त्योहार मनाया जाता है और सरस्वती देवी की पूजा की जाती है।

माँ सरस्वती का जन्म

मां सरस्वती की पूजा विधि:-

सुबह स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र धारण करें, मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें, मां सरस्वती को सफेद चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करें. मां सरस्वती का ध्यान करें. वंदना करें. “ऊं ऐं सरस्वत्यै नम:” मंत्र का 108 बार जाप करें. मां सरस्वती की आरती करें, मिसरी, दूध, दही, तुलसी, शहद मिलाकर पंचामृत का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगाएं. हलवा या केसर युक्त खीर का प्रसाद अर्पित करें. बेर,गाजर,संतरा और मालपुआ बना कर अर्पण कर सकते है सभी को प्रसाद बांटें.

इस दिन किसी भी कार्य को करना बहुत शुभ फलदायक होता है। इसलिए इस दिन गृह प्रवेश, वाहन खरीदना,नींव पूजन, नया व्यापार प्रारंभ और मांगलिक कार्य होते हैं। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते और साथ ही पीले रंग के पकवान बनाते हैं।

सरस्वती पूजा के दिन राधा-कृष्ण की पूजा:-

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती के साथ ही राधा-कृष्ण की पूजा का भी शास्त्रों में उल्लेख मिलता है। दरअसल राधा और कृष्ण प्रेम के प्रतीक हैं और इस दिन कामदेव का पृथ्वी पर आगमन होता है। प्रेम में कामकुता पर नियंत्रण और सादगी के लिए राधा-कृष्ण की पूजा का विधान सदियों से चला आ रहा है। बसंत पंचमी के दिन पहली बार राधा-कृष्ण ने एक दूसरे को गुलाल लगाया था इसलिए बसंत पंचमी पर गुलाल लगाने की परंपरा भी चली आ रही है।

श्री सरस्वती माता प्रार्थना (Prathana in Hindi)

बुध ग्रह कमजोर हो या पढ़ाई में मन ना लगे:-

ज्योतिष के अनुसार जिनकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर हो या अस्त हो या बच्चे का पढ़ाई में मन ना लगे तो बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन करना चाहिए और मां सरस्वती को हरे फल आर्पित करके

     दिव्य मन्त्र (chant 11 or 31 times)

||ॐ सरस्वती महामाया दिव्य तेजस्वरूपणी

हंसवाहिनी समयुक्ता विद्या दानं करोतु मे ॐ ||

सरस्वती माता की आरती क्यों की जाती है ?

 

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