नवरात्रि विशेष : नौ दिन की नौ देवी के नौ मंत्र-Navratri Mantra - हमारी विरासत
नवरात्रि विशेष : नौ दिन की नौ देवी के नौ मंत्र-Navratri Mantra

नवरात्रि विशेष : नौ दिन की नौ देवी के नौ मंत्र-Navratri Mantra

नौ दिन की नौ देवी के नौ सिद्ध मंत्र-Navratri Mantra

1. माता शैलपुत्री:-

शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की बेटी हैं. नवरात्रि में शैलपुत्री पूजन का विशेष महत्‍व है. मान्‍यता है कि इनके पूजन से मूलाधार चक्र जाग्रत हो जाता है. कहते हैं कि जो भी भक्‍त श्रद्धा भाव से मां की पूजा करता है उसे सुख और सिद्धि की प्राप्‍ति होती है.

कौन हैं मां शैलपुत्री? 

कथा के अनुसार मां शैलपुत्री अपने पिछले जन्म में भगवान शिव की अर्धांगिनी (सती) और दक्ष की पुत्री थीं. एक बार जब दक्ष ने महायज्ञ का आयोजन कराया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया, परंतु भगवान शंकर को नहीं बुलाया गया. उधर, सती यज्ञ में जाने के लिए व्याकुल हो रही थीं. शिवजी ने उनसे कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है लेकिन उन्हें नहीं; ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है. सती का प्रबल आग्रह देखकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी.

सती जब घर पहुंचीं तो वहां उन्होंने भगवान शिव के प्रति तिरस्कार का भाव देखा. दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक शब्द कहे. इससे सती के मन में बहुत पीड़ा हुई. वे अपने पति का अपमान सह न सकीं और यज्ञ की अग्‍नि से स्वयं को जलाकर भस्म कर लिया. इस दारुण दुःख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने उस यज्ञ को विध्वंस कर दिया. फिर यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं. shailputri mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नम:।’

2. माता ब्रह्मचारिणी:-

स्वाधिष्ठान चक्र में ध्यान कर इनकी साधना की जाती है। संयम, तप, वैराग्य तथा विजय प्राप्ति की दायिका हैं। brahmacharini mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:।’

3. माता चन्द्रघंटा :

मणिपुर चक्र में इनका ध्यान किया जाता है। कष्टों से मुक्ति तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए इन्हें भजा जाता है। chandraghanta mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघंटायै नम:।’

4. माता कुष्मांडा:-

चौथ अनाहत चक्र में ध्यान कर इनकी साधना की जाती है। रोग, दोष, शोक की निवृत्ति तथा यश, बल व आयु की दात्री मानी गई हैं। kushmanda mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम:।’

5. माता स्कंदमाता:-

इनकी आराधना विशुद्ध चक्र में ध्यान कर की जाती है। सुख-शांति व मोक्ष की दायिनी हैं। skandamata mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कंदमातायै नम:।’

6. माता कात्यायनी :-

आज्ञा चक्र में ध्यान कर इनकी आराधना की जाती है। भय, रोग, शोक-संतापों से मुक्ति तथा मोक्ष की दात्री हैं। maa katyayani mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायनायै नम:।’

7.माता कालरात्रि:-

ललाट में ध्यान किया जाता है। शत्रुओं का नाश, कृत्या बाधा दूर कर साधक को सुख-शांति प्रदान कर मोक्ष देती हैं। kalratri mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नम:।’

8. माता महागौरी :-

मस्तिष्क में ध्यान कर इनको जपा जाता है। इनकी साधना से अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं। असंभव से असंभव कार्य पूर्ण होते हैं। mahagauri mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:।’

9. माता सिद्धिदात्री:-

मध्य कपाल में इनका ध्यान किया जाता है। सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं। siddhidatri mantra

मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्यै नम:।’

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दुर्गासप्तशती पाठ :-

दुर्गा सप्तशती पाठ बहुत महत्वपूर्ण होता है नवरात्रि में इसका रोज़ पाठ किया जाता है। दुर्गा सप्तशती बहुत शक्तिशाली होता है। इसमें श्री देवी की अनन्य कृपा छिपी होती है। जो रोज़ इसका पाठ करता है उसपे देवी माँ की कृपा जरूर होती है। आज कल हम देख ही रहे है की कितनी सारी विपदाएँ मानव के जीवन में रोज़ आ रही है। इन सबसे सुरक्षा के लिए हमारे सनातन धर्म में कई मार्ग बताये गए। देवी का कवच पाठ मानव पे सुरक्षा कवच के तरह काम करता है। आप अगर इसको पूरी श्रद्धा के साथ पढ कर अपने काम पे जाते है। तो ये आपकी सब और से रक्षा करता है। क्युकी हमारे शरीर के हर अंग में माता का निवास है। इसके पाठ से वो जाग्रत हो जाती है। अध्यात्म की शक्ति अद्भुत होती है।

दुर्गा सप्तशती हिन्दू-धर्म का सर्वमान्य ग्रन्थ है।

इसमें भगवती की कृपा के सुन्दर इतिहास के साथ अनेक गूढ़ रहस्य भरे हैं। सकाम भक्त इस ग्रन्थ का श्रद्धापूर्वक पाठ कर के कामनासिद्धि तथा निष्काम भक्त दुर्लभ मोक्ष प्राप्त करते हैं। इस पुस्तक में पाठ करने की प्रामाणिक विधि, कवच, अर्गला, कीलक, वैदिक, तान्त्रिक रात्रिसूक्त, देव्यथर्वशीर्ष, नवार्णविधि, मूल पाठ, दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र, श्रीदुर्गामानसपूजा, तीनों रहस्य, क्षमा-प्रार्थना, सिद्धिकुञ्जिकास्तोत्र, पाठ के विभिन्न प्रयोग तथा आरती दी गयी है।

अगर आपके पास दुर्गा सप्तशती किताब नहीं है तो आप सबसे अच्छी दुर्गा सप्तशती के अनुवाद वाली किताब खरीद सकते है। वो किताब है। इसकी रेटिंग भी बहुत अच्छी है।

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