Maha Shivratri 2026:- जानें, कब है महाशिवरात्रि, पूजा-अभिषेक का शुभ मुहूर्त एवं विधि
महाशिवरात्रि पूजा(Maha Shivratri kab hai )
फाल्गुन महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि व्रत किया जाता है और सावन शिवरात्रि(sawan shivaratri) हर साल सावन के महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आती है . चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं। इसलिए हर महीने कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भी शिवरात्रि व्रत किया जाता है जिसे मास शिवरात्रि व्रत कहा जाता है।
इसी दिन माता पार्वती तथा भगवान शिव का विवाह हुआ था। इस तरह सालभर में 12 शिवरात्रि व्रत किए जाते हैं लेकिन इनमें फाल्गुन महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी बहुत खास है। यानी फरवरी या मार्च में आने वाली इस तिथि को महाशिवरात्रि के रुप में मनाया जाता है। इस बार maha shivratri kab hai महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है. इस पर पूरे दिन व्रत किया जाता है और मध्यरात्रि में शिवजी की पूजा की जाती है।

ईशान संहिता के अनुसार ‘फाल्गुनकृष्णचर्तुदश्याम् आदि देवो महानिशि। शिवलिंगतयोद्भुत: कोटिसूर्यसमप्रभ:। तत्कालव्यापिनी ग्राह्या शिवरात्रिव्रते तिथि:।’
अर्थात् फागुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को आदिदेव भगवान श्री शिव करोड़ों सूर्य के समान प्रभाव वाले लिंगरूप में प्रकट हुए इस रात को कालरात्रि और सिद्धि की रात भी कहते हैं। यही कारण है कि महाशिवरात्रि के पर्व को शिव साधक बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं और पूजा और कीर्तन करते हैं।
maha shivratri kab hai 2026: शुभ मुहूर्त एवं विधि, व्रत के लिए समय, व्रत खोलने के लिए समय :-
दृक पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार, नई दिल्ली के समय अनुसार महाशिवरात्रि की समय-सारिणी इस प्रकार है:
- महाशिवरात्रि तिथि: 15 फरवरी 2026, रविवार।
- चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे।
- चतुर्दशी तिथि का समापन: 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे।
- निशिता काल पूजा का समय (मध्यरात्रि): 16 फरवरी को प्रातः 12:09 बजे से 01:01 बजे तक (अवधि: 52 मिनट)।
- व्रत पारण का समय: 16 फरवरी को सुबह 06:59 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक।
रात्रि प्रहर पूजा का समय (15-16 फरवरी की रात): भक्त पूरी रात को चार प्रहरों में बांटकर भी पूजा कर सकते हैं:
- प्रथम प्रहर: शाम 06:11 से रात 09:23 तक।
- द्वितीय प्रहर: रात 09:23 से प्रातः 12:35 तक।
- तृतीय प्रहर: प्रातः 12:35 से 03:47 तक।
- चतुर्थ प्रहर: प्रातः 03:47 से सुबह 06:59 तक।
महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा’ (Mahashivratri Char Pahar Puja)
महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि में कैसे करें भगवान शिव का रुद्राभिषेक:-
शिवरात्रि को भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।परमपिता को प्रसन्न करने तथा मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए रुद्राभिषेक बहुत ही आवश्यक है।
1- गाय के दुग्ध से रुद्राभिषेक करने से संपन्नता आती है तथा मन में की गई मनोकामना पूर्ण होती है।
2- जो लोग रोग से पीड़ित हैं तथा प्रायः अस्वस्थ रहते हैं या किसी गंभीर महा बीमारी से परेशान हैं उनको कुशोदक से रुद्राभिषेक करना चाहिए। कुश को पीसकर गंगा जल में मिला लीजिए फिर भगवान शिव का नियम तथा श्रद्धा पूर्वक रुद्राभिषेक करें।
3- धन प्राप्ति के लिए देसी घी से रुद्राभिषेक करें।
4- निर्विध्न रूप से किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए तीर्थ स्थान के नदियों के जल से रुद्राभिषेक करें। इससे भक्ति भी प्राप्त होती है।
5- गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करने से कार्य बाधाएं समाप्त होती हैं तथा वैभव और सम्पन्नता में वृद्धि होती है।
6- शहद से रुद्राभिषेक करने से जीवन के दुख समाप्त होते हैं तथा खुशियां आती हैं।
7- किसी शिव मंदिर में शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करें या घर पर ही पार्थिव का शिवलिंग बनाकर रुद्राभिषेक करें।
महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि को करें महामृत्युंजय मंत्र का जप –
इस दिन महामृत्युंजय मंत्र के जप से रोगों से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति दीर्घायु होता है।गंभीर रोग से पीड़ित लोग निश्चित संख्या मवन शिवमंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान बैठाएं।
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ।।
tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ pushtivardhanam ǀ
urvārukamiva bandhanān mrityormukshīya mā’mratāt ǁ
इस प्रकार महाशिवरात्रि को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य बनाएं।निर्मल मन से की गई पूजा पर भगवान शिव मनोवांछित फलों को प्रदान करते हैं।
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महा शिवरात्रि और सावन शिवरात्रि के दौरान शिव पूजा का महत्व:
भगवान शिव हिंदू देवता और हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं में से एक हैं। वह पूर्णता, योग, dudheshwarnath mandir ध्यान, आनंद और आध्यात्मिकता का केंद्र है। प्राचीन वैदिक काल में, प्रसिद्ध संतों (ब्राह्मणों) ने मोक्ष के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद मांगा, समर्थ योद्धाओं (क्षत्रियों) ने उनसे सम्मान, शक्ति और बहादुरी के लिए प्रार्थना की, व्यापारियों और व्यापारियों (वैश्य) ने उन्हें धन और लाभ के लिए पूजा की। वर्ग (शूद्रों) ने दैनिक रोटी और मकान के लिए उनकी पूजा की। भगवान दोनों प्रकार के भक्तों के लिए अभयारण्य है, जो धन और सांसारिक सुखों की तलाश करते हैं और जो दुनिया के दुखों से मुक्ति चाहते हैं।
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महाशिवरात्रि या सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग अभिषेक का महत्व:-
| शिवलिंग आध्यात्मिक आराधना की पूजा का अनुष्ठान | आध्यात्मिक ध्यान |
| शिव लिंग को जल, दूध और शहद से स्नान कराएं और बेल के पत्ते अर्पित करें | आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करता है |
| स्नान करने के बाद शिव लिंग पर चंदन लगाएं। | दिव्य सुगंध के साथ अपने आप को शुद्ध करना और भरना |
| फल का चढ़ावा। | इच्छाओं की दीर्घायु और संतुष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। |
| धूप जलाना | उच्चतर इंद्रियों का समर्पण। |
| दीपक का प्रकाश | ज्ञान की प्राप्ति |
| पान का पत्ता | सांसारिक सुखों से संतुष्टि का प्रतिनिधित्व करता है |
| माथे पे और शिवलिंग पर त्रिपुंड्र लगाना (पवित्र राख की तीन क्षैतिज पट्टियों)। | आध्यात्मिक ज्ञान, पवित्रता और तपस्या का प्रतिनिधित्व करता है। (यह भगवान शिव की तीन आंखों का प्रतीक भी है) |
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महाशिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता: पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि वह दिन है जब शिव और शक्ति का विवाह हुआ था। नारायणी शिला, हरिद्वार के पीठाधीश्वर पं. मनोज त्रिपाठी के अनुसार, इसी दिन चंद्रमा का भी जन्म हुआ था और शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया था। महानिर्वाणी अखाड़े के महंत रविंद्र पुरी जी के अनुसार, भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जो बहुत सरलता से प्रसन्न हो जाते हैं; मात्र गंगाजल की एक बूंद से भी उनका अभिषेक किया जा सकता है।
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण: सद्गुरु (ईशा फाउंडेशन) के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन उत्तरी गोलार्ध में ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि मनुष्य के भीतर ऊर्जा का प्राकृतिक रूप से ऊपर की ओर प्रवाह होता है। इसलिए, इस रात रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर पूरी रात जागना (जागरण करना) आध्यात्मिक उत्थान के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है।
आर्ट ऑफ लिविंग के गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के अनुसार, शिव कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि वह ऊर्जा या ‘तत्व’ है जिससे पूरा ब्रह्मांड बना है। महाशिवरात्रि अपनी चेतना में विश्राम करने और ‘शिव तत्व’ का उत्सव मनाने का समय है।
पूजा विधि और उपाय (Puja Vidhi)
भक्तों को महाशिवरात्रि के दिन निम्नलिखित विधियों का पालन करना चाहिए:
- व्रत और संकल्प: त्रयोदशी (एक दिन पहले) को केवल एक समय भोजन करें। शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान के बाद पूरे दिन के उपवास का ‘संकल्प’ लें और अगले दिन ही भोजन ग्रहण करें।
- स्नान: शाम को पूजा करने या मंदिर जाने से पहले दोबारा स्नान करना शुभ माना जाता है।
- अभिषेक: शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, शहद और घी से करें।
- लक्ष्मी प्राप्ति के लिए बेलपत्र चढ़ाएं।
- सुख के लिए भांग अर्पित करें।
- मोक्ष की कामना के लिए धतूरा चढ़ाएं।
- मंत्र: ‘ओम नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
पौराणिक कथा (Vrat Katha)
महाशिवरात्रि से जुड़ी एक प्रचलित कथा एक शिकारी (भील) की है, जिसका नाम गुरु-द्रुह था। शिकार की खोज में वह एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया और अनजाने में पूरी रात वहां बैठा रहा। हिलने-डुलने के कारण उसके पास रखे बेलपत्र और पसीना नीचे स्थित शिवलिंग पर गिरते रहे। अनजाने में की गई इस पूजा से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसे मोक्ष प्रदान किया। यह कथा दर्शाती है कि शिव अज्ञानता में की गई पूजा को भी स्वीकार करते हैं।
इसके अलावा, ज्योतिर्लिंगों के प्राकट्य की कथाएं (जैसे सोमनाथ और मल्लिकार्जुन) भी शिव की महिमा का वर्णन करती हैं।
निष्कर्ष
महाशिवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार और नकारात्मकता को दूर करने का अवसर है। हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित के अनुसार, यह रात्रि जीवन की व्याधियों और नकारात्मकता का नाश करने के लिए उत्तम है। चाहे आप गृहस्थ हों या साधक, यह रात्रि सभी के लिए कल्याणकारी है। इस दिन जागरण, ध्यान और शिव आराधना करने से मनुष्य अपनी सीमाओं से परे जाकर असीम ‘शिव तत्व’ का अनुभव कर सकता है।
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