उसकी मर्ज़ी से हो फिर उस बात पे कभी शक न हो।

हमारे जीवन में जो भी घटित होता हैं, उसका कहीं न कहीं कुछ ख़ास Reason होते हैं | जिंदगी में सुख, दुःख, व सभी तरह की परेशानियों के आने का कोई न कोई मतलब जरूर होता हैं | कई बार हम ईश्वर के इशारों को समझ ही नहीं पाते और गलती कर बैठते हैं और फिर उसी ईश्वर को दोष देतें हैं – की मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता हैं |

जो होता है इसके पीछे कारण जरूर होता है Everything happens for a reason story with moral:-

राजा भानूप्रताप नास्तिक प्रव्रत्ति के थे। वह भगवान पर विश्वास नही करते थे। भानुप्रताप का एक मंत्री था जिसका नाम शिवप्रताप सिंह था। उनका भगवान में अटुट विश्वास था।

वे भगवान को ही सर्वश्रेष्ठ मानते थे। उनका भगवान मे इतना विश्वास था कि जब भी कुछ अच्छा-बुरा होता वह यही कहता- भगवान जो करता हैं, अच्छा ही करता है। यह वाक्य मंत्री का ‘तकिया कलाम’ बन गया था।
एक दिन राजा की अंगुली मे एक कांटा चुभ गया। राजा की उंगली पक गयी। बहुत इलाज कराने पर भी वह ठीक नही हुई। राजवैद्य को खतरा होने लगा कि कहीं पकी हुई उंगली का जहर सारे शरीर में न फैल जाये इसलिए उन्होंने राजा को उंगली कटवाने की सलाह दी। मजबुरी वष राजा को उंगली कटवानी पडी। सभी दरबारी व मंत्री राजा का हालचाल पुछने आये! सभी ने राजा की उंगली के कट जाने पर दुख व्यक्त किया लेकिन मंत्री शिवप्रताप सिंह ने दुख प्रकट करने के जगह पर यही कहा – ‘भगवान जो करता हैं, अच्छे के लिए करता है।’
मंत्री की बात सुनकर राजा को बडा क्रोध आया। उन्होंने सोचा कि मेरी तो उंगली कट गयी और मंत्री कह रहा है- भगवान जो करता हैं, अच्छे के लिए करता है। उन्होंने मंत्री को मजा चाखाने की ठान ली।
एक दिन राजा ने शिकार खेलने की योजना बनाई। उन्होंने मंत्री शिवप्रताप सिंह को भी साथ ले लिया।
दोनों घोडे पर सवार हूए। और जंगल की ओर चल दिये। रास्ते में उन्हें एक कुआ दिखाई दिया, दोनो प्यासे थे। राजा ने मंत्री से कुए में झांक कर कुए में पानी देखने को कहा, जैसे ही मंत्री ने कुए में झांका, पीछें से राजा ने उन्हें धक्का दे दिया। कुआ सुखा था, राजा ने कुए में झांककर मंत्री से पूछा – ‘कहो मंत्रीजी कैसी रही ?’ मंत्री कुए के अंदर से बोले- ‘भगवान जो करता हैं, अच्छे के लिए करता है।’
तो अब यही कुए में मरो। और अपने भगवान की माला जपो, मैं तो चला। इतना कहकर राजा घोडे पर सवार होकर राजमहल की ओर लौट चला।

अभी राजा कुछ ही दूर गया होगा कि, उसे तीरों-भालो से लेस खुंखार आदिवासीयों ने रस्सीयों से बांध डाला। मोटे तगडे राजा को पाकर आदिवासी बहुत प्रसन्न हुए और नाचने गाने लगे। वे लोग अपने वन देवी के आगे नर बलि, चढाने के लिए एक तगडे आदमी की खोज में निकले थे। उन्हें गहनो, कपडो से सजा राजा मिल गया। वे सब राजा को लेकर बलि वाले स्थान पर पहुंचे । उनका सरदार भी राजा को देखकर बडा खुश हुआ। उसने पुरोहित को बुलाकर राजा का निरीक्षण करवाया। पुरोहित ने राजा के शरीर को बारीकी से परखा। राजा डर के मारे कांप रहा था। सामने जल्लाद नंगी तलवार लिये खडा था।
तभी पुरोहित की नजर राजा की कंटी हुइ उंगली पर पडी वह चिल्लाया- वनदेवी खण्डित शरीर की बलि नही लेगी। इसकी उंगली कटी हुई है। इसकी बलि नही चढाई जा सकती। आदिवासीयों ने राजा को छोड दिया। राजा ने भगवान का धन्यवाद दिया और मन ही मन सोचा मंत्री ठीक कहता है। मैंने उसे नाहक ही कुए में डाला।
राजा घोडे पर सवार होकर कुए के पास आया। घोडे की रस्सी खोलकर कुए में लटका कर मंत्री को बाहर निकाला। अपनी गलती की क्षमा मांगते हुए बोला- मंत्री तुम ठीक कहते हो भगवान जो करता हैं, अच्छे के लिए करता है।
मेरी उंगली कटी हुई थी इसी कारण मैं भगवान की कृपा से बच गया। मगर तुम्हे अंधे कुए में फेकने में भगवान ने तुम्हारे साथ क्या अच्छा किया ? ‘मंत्री मुस्कुराता हुआ बोला’- “महाराज! यदि मैं आपके साथ होता तो आदिवासीयो द्वारा मेैं भी पकडा जाता।” आप तो कटी उंगली के कारण बच गये, लेकिन मैं किस प्रकार बच पाता ? मंत्री का उत्तर सुनकर राजा निरूत्तर हो गये। मंत्री ने फिर कहा- इसीलिए कहता हूं- भगवान जो करता हैं अच्छा ही करता है।

“मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में परमात्मा को नही भुलना चाहिए। उसका हर हाल में धन्यवाद अदा करना चाहिए। सारा संसार का दाता किसी के साथ बुरा क्यों करने लगा- किसी के साथ यदि कुछ गलत भी होता है तो समझाना चाहिए कि इसमें भी परमात्मा की कुछ मर्जी होगी। जैसा कि मंत्री के साथ हुआ- राजा ने उसे कुए में धकेला, जिसकी वजह से वह आदिवासीयों द्वारा पकडे व बलि चढाये जाने से बच गया। इस लिए इस वाक्य को अपने जीवन में जब भी बुरा वक्त आएं तब जरूर दोहराएं – क्योंकि, “भगवान जो करता हैं, अच्छा करता है।”

 

 

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