पुरुषोतम मास माहात्म्य/अधिक मास माहात्म्य अध्याय– 15
Adhik mas chapter-15
श्रीनारायण बोले
:-
सुदेवशर्म्मा ब्राह्मण हाथ जोड़कर गद्गद
Adhik mas chapter-15
श्रीनारायण बोले
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सुदेवशर्म्मा ब्राह्मण हाथ जोड़कर गद्गद
Adhik mas chapter-14
श्रीनारायणजी बोले
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इसके बाद चिन्ता से आतुर राजा दृढ़धन्वा के
Adhik Mas chapter- 13 ऋषि लोग बोले:- हे सूत! हे महाभाग! हे सूत! हे बोलने वालों में श्रेष्ठ!
Adhik mas chapter-12 नारदजी बोले:- जब भगवान् शंकर चले गये तब हे प्रभो! उस बाला ने शोककर क्या
कृष्ण और राधा के अमर-निस्वार्थ प्रेम को बचपन से हमें बताया गया है। श्री राधा कृष्ण ने सच्चे निष्काम
यह "कृष्ण हरे मंत्र"(krishna hare mantra) केवल शब्द नहीं है, यह हृदय की गहराइयों से उठने वाली एक
Adhik mas chapter-11 नारदजी बोले:- सब मुनियों को भी जो दुष्कर कर्म है ऐसा बड़ा भारी तप जो इस
नारद जी बोले:- 'हे तपोनिधे! परम क्रोधीदुर्वासा मुनि ने विचार करके उस कन्या से क्या उपदेश दिया। सो
adhik mas chapter-09 सूतजी बोले:- तदनन्तर विस्मय से युक्त नारद मुनि ने मेधावी ऋषि की कन्या का
सनातन धर्म के अनुसार, सनातन धर्म एक विश्व-दृष्टिकोण है जो प्रकृति में विश्वव्यापी है। और जिसका पालन