Somnath Mandir History in Hindi: 1026 से 2026 तक – विनाश पर विश्वास की 1000 साल पुरानी जीत
अगर पत्थर बोल सकते, तो Somnath Mandir की दीवारें दुनिया को संघर्ष और जीत की सबसे बड़ी कहानी सुनातीं।
आज हम जनवरी 2026 में खड़े हैं। यह साल हमारे इतिहास के लिए बहुत खास है। ठीक 1000 साल पहले, जनवरी 1026 में, विदेशी आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने इस मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी। उसका मकसद था—भारत की आस्था को मिटाना।
लेकिन आज 1000 साल बाद, गजनवी इतिहास के पन्नों में खो गया है, और सोमनाथ मंदिर पहले से भी ज्यादा भव्य रूप में खड़ा है। Hamari Virasat के इस ब्लॉग में, आज हम जानेंगे Somnath Mandir ka Itihas और इसकी कभी न हारने वाली जिजीविषा (Resilience) की कहानी।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास: 1026 का वो काला दिन (Somnath Mandir History):-
गुजरात के सौराष्ट्र में समुद्र के किनारे स्थित सोमनाथ मंदिर, भगवान शिव के 12 Jyotirlinga में से पहला माना जाता है। इसे “प्रभास पाटन” भी कहा जाता है।
प्राचीन काल में यह मंदिर इतना समृद्ध था कि इसमें टनों सोना और रत्न जड़े हुए थे। इसी समृद्धि ने विदेशी लुटेरों को आकर्षित किया।
- 1026 ईस्वी में हमला: महमूद गजनवी ने 5000 साथियों के साथ मंदिर पर हमला किया। इतिहासकार बताते हैं कि 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राण त्याग दिए।
- गजनवी ने शिवलिंग को खंडित किया और मंदिर का खजाना लूटकर ले गया। उसे लगा कि मंदिर खत्म हो गया, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि पत्थरों को तोड़ा जा सकता है, विश्वास को नहीं।
सोमनाथ मंदिर किसने बनवाया? (Who Built Somnath Temple)
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि आखिर Somnath Mandir Kisne Banwaya? पौराणिक कथाओं के अनुसार:
- सबसे पहले चंद्रदेव (सोम) ने इसे सोने से बनवाया था।
- फिर रावण ने इसे चांदी से बनवाया।
- भगवान श्री कृष्ण ने इसे चंदन की लकड़ी से बनवाया।
ऐतिहासिक रूप से, इसे अलग-अलग राजाओं ने बार-बार बनवाया:
- गजनवी के हमले के तुरंत बाद, राजा भीमदेव और राजा भोज ने इसे फिर से खड़ा किया।
- बाद में, जब मुगलों के समय मंदिर को तोड़ा गया, तो मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर (Ahilyabai Holkar) ने 1783 में मुख्य मंदिर के पास एक नया मंदिर बनवाया ताकि पूजा-पाठ न रुके। उन्होंने ही सोमनाथ की लौ को सबसे कठिन समय में जलाए रखा।
1947: आधुनिक भारत का संकल्प (Sardar Patel & Somnath):-
आजादी के बाद, Sardar Vallabhbhai Patel (लौह पुरुष) ने कसम खाई कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा था:
“सोमनाथ का पुनरुत्थान भारत के स्वाभिमान का पुनरुत्थान है।”
1951 में भारत के पहले राष्ट्रपति Dr. Rajendra Prasad ने मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की। आज जो भव्य मंदिर हम देखते हैं, वह चालुक्य शैली (Kailash Mahameru Prasad Style) में बना है।
सोमनाथ मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting Facts about Somnath):-
अगर आप Somnath Mandir Gujarat जाने का प्लान कर रहे हैं, तो ये बातें आपको हैरान कर देंगी:
- बाण स्तंभ (Baan Stambh): मंदिर परिसर में एक दिशा-दर्शक स्तंभ है। उस पर लिखा है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव (South Pole) तक बीच में कोई भी जमीन (Landmass) नहीं है। यह हमारे पूर्वजों के भूगोल ज्ञान का अद्भुत सबूत है।
- 3 बार आरती: यहाँ रोज 3 बार भव्य आरती होती है—सुबह 7:00, दोपहर 12:00 और शाम 7:00 बजे।
- लाइट एंड साउंड शो: शाम को यहाँ “Jay Somnath” नाम से एक शो होता है, जिसमें मंदिर का इतिहास दिखाया जाता है।
2026 का संदेश
Somnath Mandir History in Hindi हमें सिखाती है कि विध्वंस चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, निर्माण की शक्ति हमेशा उससे बड़ी होती है।
1026 से 2026 का यह 1000 साल का सफर सिर्फ एक मंदिर का नहीं, बल्कि ‘सनातन धर्म’ के धैर्य और साहस का है। अगर आपको अपनी Virasat पर गर्व है, तो इस बार सोमनाथ दर्शन जरूर करें।
“जहाँ सरदार पटेल ने इस मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था, वहीं वर्तमान प्रधानमंत्री Narendra Modi (जो सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं) के हालिया दौरों और विकास कार्यों ने सोमनाथ तीर्थ को आधुनिक भव्यता और वैश्विक पहचान दिलाई है।”
“इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए, हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi (सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष) ने मंदिर परिसर का दौरा किया और कई नई परियोजनाओं की शुरुआत की। उनके नेतृत्व में सोमनाथ अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक विश्वस्तरीय तीर्थ स्थल (World Class Pilgrimage Center) बन चुका है।”
जय सोमनाथ! हर हर महादेव! 🚩
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