आज की तिथि(Aaj ki tithi) के बारे में:-
आज की तिथि हिंदू पंचांग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नीचे दिए गए आज की तिथि टूल की सहायता से आप वर्तमान तिथि, पक्ष, तिथि समाप्त होने का समय, अगली तिथि, कल की तिथि और आने वाले दिनों की तिथियाँ देख सकते हैं। किसी विशेष तारीख की तिथि जानने के लिए तारीख चुनकर तिथि खोजने की सुविधा का भी उपयोग किया जा सकता है।
हिंदू पंचांग में सामान्य तारीख और तिथि एक ही चीज नहीं होतीं। अंग्रेजी कैलेंडर का दिन मध्यरात्रि से अगली मध्यरात्रि तक चलता है, जबकि हिंदू तिथि सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति पर आधारित होती है। इसी कारण कोई तिथि सुबह, दोपहर, शाम या रात में समाप्त हो सकती है।
आज कौन-सी तिथि (Aaj ki tithi) चल रही है और वह कितने बजे तक रहेगी, यह जानना व्रत, पूजा, पर्व और कई पारंपरिक धार्मिक कार्यों के लिए उपयोगी माना जाता है।
आज की तिथि क्या है? – 16 अक्टूबर 2026
शुक्रवार • भारतीय मानक समय (IST)
किसी भी तारीख की तिथि और त्योहार खोजें
तिथि समय एक नज़र में
16 अक्टूबर 2026
शुक्रवार
शुक्ल पक्ष पंचमी — रात 3:25 बजे तक · शुक्ल पक्ष षष्ठी — सुबह 5:54 बजे तक
17 अक्टूबर 2026
शनिवार
शुक्ल पक्ष षष्ठी — सुबह 5:54 बजे तक · शुक्ल पक्ष सप्तमी — सुबह 8:28 बजे तक
आने वाले 7 दिनों की तिथियाँ
एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या
यह खगोलीय तिथि-अवधि है। व्रत/त्योहार की पालन-तिथि सूर्योदय और परंपरागत नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।
आज की तिथि के बारे में:-
आज की तिथि हिंदू पंचांग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊपर दिए गए आज की तिथि टूल की सहायता से आप वर्तमान तिथि, पक्ष, तिथि समाप्त होने का समय, अगली तिथि, कल की तिथि और आने वाले दिनों की तिथियाँ देख सकते हैं। किसी विशेष तारीख की तिथि जानने के लिए तारीख चुनकर तिथि खोजने की सुविधा का भी उपयोग किया जा सकता है।
हिंदू पंचांग में सामान्य तारीख और तिथि एक ही चीज नहीं होतीं। अंग्रेजी कैलेंडर का दिन मध्यरात्रि से अगली मध्यरात्रि तक चलता है, जबकि हिंदू तिथि सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति पर आधारित होती है। इसी कारण कोई तिथि सुबह, दोपहर, शाम या रात में समाप्त हो सकती है।
आज कौन-सी तिथि चल रही है और वह कितने बजे तक रहेगी, यह जानना व्रत, पूजा, पर्व और कई पारंपरिक धार्मिक कार्यों के लिए उपयोगी माना जाता है।
तिथि क्या होती है?
हिंदू पंचांग में तिथि एक चंद्र दिवस है। इसकी गणना सूर्य और चंद्रमा के बीच बढ़ते कोणीय अंतर के आधार पर की जाती है। जब यह अंतर लगभग 12 अंश बढ़ता है तो अगली तिथि प्रारंभ होती है।
एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियाँ होती हैं। इन्हें दो पक्षों में बांटा जाता है:
शुक्ल पक्ष — अमावस्या के बाद चंद्रमा बढ़ने की अवधि।
कृष्ण पक्ष — पूर्णिमा के बाद चंद्रमा घटने की अवधि।
प्रत्येक पक्ष में सामान्यतः 15 तिथियाँ होती हैं।
तिथि की गणना कैसे होती है?
तिथि का निर्धारण केवल घड़ी या सूर्योदय के आधार पर नहीं होता। इसका मूल आधार सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति है।
सरल रूप में:
चंद्रमा की देशांतर स्थिति − सूर्य की देशांतर स्थिति = दोनों के बीच कोणीय अंतर
प्रत्येक 12° का परिवर्तन एक नई तिथि को दर्शाता है।
इसी वजह से हर तिथि ठीक 24 घंटे लंबी नहीं होती। कोई तिथि एक कैलेंडर दिन के बीच समाप्त हो सकती है और उसी दिन अगली तिथि शुरू हो सकती है। यही कारण है कि कभी-कभी एक ही अंग्रेजी तारीख पर दो हिंदू तिथियाँ दिखाई देती हैं।
आज की तिथि कितने बजे तक है?
आज की वर्तमान तिथि ऊपर दिए गए लाइव तिथि टूल में दिखाई गई है। उसके साथ तिथि समाप्त होने का सही समय और उसके बाद प्रारंभ होने वाली अगली तिथि भी देखी जा सकती है।
आज कौन सा पक्ष है?
हिंदू पंचांग के प्रत्येक चंद्र मास को दो भागों में बांटा जाता है—शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।
शुक्ल पक्ष
अमावस्या के बाद जब चंद्रमा का प्रकाशित भाग बढ़ता जाता है, उस अवधि को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। यह शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर पूर्णिमा पर समाप्त होता है।
कृष्ण पक्ष
पूर्णिमा के बाद जब चंद्रमा का प्रकाशित भाग धीरे-धीरे घटता जाता है, उस अवधि को कृष्ण पक्ष कहा जाता है। यह कृष्ण प्रतिपदा से शुरू होकर अमावस्या तक चलता है।
ऊपर दिए गए Aaj Ki Tithi Tool में वर्तमान पक्ष स्वतः दिखाया जाता है।
हिंदू पंचांग की 30 तिथियाँ
| क्रम | शुक्ल पक्ष | कृष्ण पक्ष |
|---|---|---|
| 1 | शुक्ल प्रतिपदा | कृष्ण प्रतिपदा |
| 2 | शुक्ल द्वितीया | कृष्ण द्वितीया |
| 3 | शुक्ल तृतीया | कृष्ण तृतीया |
| 4 | शुक्ल चतुर्थी | कृष्ण चतुर्थी |
| 5 | शुक्ल पंचमी | कृष्ण पंचमी |
| 6 | शुक्ल षष्ठी | कृष्ण षष्ठी |
| 7 | शुक्ल सप्तमी | कृष्ण सप्तमी |
| 8 | शुक्ल अष्टमी | कृष्ण अष्टमी |
| 9 | शुक्ल नवमी | कृष्ण नवमी |
| 10 | शुक्ल दशमी | कृष्ण दशमी |
| 11 | शुक्ल एकादशी | कृष्ण एकादशी |
| 12 | शुक्ल द्वादशी | कृष्ण द्वादशी |
| 13 | शुक्ल त्रयोदशी | कृष्ण त्रयोदशी |
| 14 | शुक्ल चतुर्दशी | कृष्ण चतुर्दशी |
| 15 | पूर्णिमा | अमावस्या |
स प्रकार एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ पूरी होती हैं। प्रतिपदा से चतुर्दशी तक की तिथियाँ दोनों पक्षों में आती हैं, जबकि शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि अमावस्या होती है।
तिथि और तारीख में क्या अंतर है?
तारीख सामान्य Gregorian calendar का दिन है, जैसे 10 सितंबर 2026।
तिथि हिंदू चंद्र पंचांग का समयखंड है, जैसे कृष्ण चतुर्दशी।
एक तारीख हमेशा मध्यरात्रि पर बदलती है, लेकिन तिथि किसी भी समय बदल सकती है। इसलिए ऐसा संभव है कि सुबह एक तिथि हो और शाम तक दूसरी तिथि प्रारंभ हो जाए।
यही कारण है कि “आज तारीख क्या है?” और “आज की तिथि क्या है?” दो अलग प्रश्न हैं।
एक ही दिन में दो तिथियाँ क्यों होती हैं?
क्योंकि हिंदू तिथि 24 घंटे के fixed clock-day से बंधी नहीं होती।
उदाहरण के लिए यदि किसी दिन चतुर्दशी सुबह 10:30 बजे समाप्त होती है, तो:
मध्यरात्रि → सुबह 10:30
चतुर्दशी
सुबह 10:30 → आगे
अमावस्या
सूर्योदय की तिथि का महत्व क्या है?
हिंदू व्रत और त्योहारों के निर्धारण में केवल “रात 12 बजे कौन-सी तिथि थी” देखना पर्याप्त नहीं होता। कई धार्मिक निर्णयों में यह देखा जाता है कि सूर्योदय के समय कौन-सी तिथि उपस्थित है, जबकि कुछ पर्वों में मध्याह्न, प्रदोष, निशीथ या अन्य निर्धारित काल महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसीलिए astronomical Tithi और व्रत/त्योहार की पालन तिथि हमेशा एक ही simple rule से निर्धारित नहीं होती।
तिथि और व्रत-त्योहार
हिंदू त्योहारों और व्रतों का संबंध पंचांग की तिथियों से गहराई से जुड़ा है। उदाहरण के लिए एकादशी व्रत एकादशी तिथि से, पूर्णिमा के अनेक पर्व पूर्णिमा तिथि से और अमावस्या से जुड़े अनुष्ठान अमावस्या तिथि से जुड़े होते हैं।
इसी प्रकार जन्माष्टमी, राम नवमी, गणेश चतुर्थी, महाशिवरात्रि और अन्य पर्व विशेष चंद्र तिथियों पर मनाए जाते हैं।
लेकिन त्योहार की अंतिम पालन तिथि निर्धारित करते समय सिर्फ तिथि का नाम पर्याप्त नहीं होता; पारंपरिक पंचांग नियम, तिथि का आरंभ-अंत और कई मामलों में सूर्योदय या विशेष पूजा-काल को भी ध्यान में रखा जाता है।
पूर्णिमा और अमावस्या क्या हैं?
पूर्णिमा
शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि को पूर्णिमा कहा जाता है। इस समय चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी से लगभग पूर्ण दिखाई देता है। विभिन्न हिंदू परंपराओं में पूर्णिमा से जुड़े व्रत, स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है।
अमावस्या
कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि अमावस्या कहलाती है। कई परंपराओं में यह पितृ-स्मरण, तर्पण, दान और आध्यात्मिक साधना से जुड़ी होती है।
“इस महीने की पूर्णिमा और अमावस्या ऊपर कैलेंडर में देखें” aaj ki tithi
एकादशी क्या है?
हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। इसलिए सामान्यतः एक चंद्र मास में दो एकादशी आती हैं—एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में।
वैष्णव परंपराओं में एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है और कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं।
2026 की एकादशी तिथियाँ →
FAQs — ये जरूर रखें
आज की तिथि क्या है?
आज की वर्तमान हिंदू तिथि ऊपर दिए गए लाइव Aaj Ki Tithi Tool में देखी जा सकती है। Tool वर्तमान तिथि के साथ पक्ष, समाप्ति समय और अगली तिथि भी दिखाता है।
आज कौन-सी तिथि चल रही है?
ऊपर “अभी की तिथि” section वर्तमान समय में चल रही तिथि दिखाता है। यदि दिन के दौरान तिथि बदलती है तो अगली तिथि और उसका समय भी दिया जाता है।
आज की तिथि कितने बजे तक है?
हर तिथि का समाप्ति समय अलग होता है। आज की तिथि का current end time ऊपर live calculator में दिया गया है।
कल कौन-सी तिथि है?
Aaj Ki Tithi Tool के “कल की तिथि” section में अगले दिन की तिथि और उसके transition time को देखा जा सकता है।
एक तिथि कितने घंटे की होती है?
तिथि fixed 24 घंटे की नहीं होती। इसकी अवधि सूर्य और चंद्रमा की बदलती relative motion पर निर्भर करती है, इसलिए अवधि कम या अधिक हो सकती है।
एक दिन में दो तिथियाँ हो सकती हैं?
हाँ। क्योंकि तिथि मध्यरात्रि पर जरूरी नहीं बदलती। यदि पहली तिथि दिन में समाप्त हो जाती है, उसी Gregorian तारीख पर अगली तिथि शुरू हो सकती है।
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष क्या है?
अमावस्या से पूर्णिमा तक बढ़ते चंद्र चरण को शुक्ल पक्ष और पूर्णिमा से अमावस्या तक घटते चरण को कृष्ण पक्ष कहा जाता है।
क्या तिथि और तारीख समान हैं?
नहीं। Gregorian तारीख midnight-to-midnight calendar day है जबकि हिंदू Tithi सूर्य और चंद्रमा की angular relationship पर आधारित lunar period है।
कुछ प्रसिद्ध जानकारी के बारे में जाने:- नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें और जानकारी प्राप्त करे।
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नीचे एक “पंचांग और व्रत से जुड़ी जानकारी” :
आज का पंचांग • एकादशी • पूर्णिमा • अमावस्या • प्रदोष व्रत • संकष्टी चतुर्थी • हिंदू त्योहार कैलेंडर • जन्माष्टमी • महाशिवरात्रि • नवरात्रि