रंगजी मंदिर

रंगजी मंदिर

Description

 एक बार खुलता है इस मंदिर का दरवाजा साल में, पार करने से मिलता है मोक्ष

प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर और श्री रंगजी मंदिर। श्री रंगजी मंदिर वृन्दावन का सबसे बड़ा मंदिर है, जिसका निर्माण द्रविड़ शैली (जो कि श्रीविल्लिपुत्तुर की प्रतिकृति है) में 1851 में हुआ था और भगवान रंगनाथ को समर्पित था या रंगजी के रूप में भी जाना जाता है, जो भगवान विष्णु को दर्शाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु अपनी शेषाशयी मुद्रा में हैं और पवित्र सेशा नागा के विशाल कोयल्स पर आराम कर रहे हैं।
केवल भगवान विष्णु ही नहीं, बल्कि इस मंदिर में भगवान नारसिंह, देवी सीता, भगवान राम और भगवान लक्ष्मण, भगवान वेणुगोपाल और भगवान रामानुजैकार्य की पूजा कर सकते हैं। यहां मुख्य पुजारी दक्षिण भारतीय ब्राह्मण हैं। इस मंदिर में, हिंदुओं में प्रवेश नहीं किया जा सकता है जहां देवता स्थित है। गैर-हिंदू केवल आंगन तक प्रवेश कर सकते हैं और गैर-भारतीय केवल पहले द्वार तक ही प्रवेश कर सकते हैं। द्वितीय द्वार पर चलने वाले द्वार द्वार पर 1 रुपए का प्रदर्शन होता है


ऐसी पवित्र भूमि पर स्थित श्रीरंगजी का मंदिर, दक्षिण भारतीय शैली से विनिर्मित है। श्रीरामानुज संप्रदाय का यह विशाल एवं भव्य मंदिर देश-विदेश से आए हुए तीर्थ यात्रियों का प्रमुख आकर्षक केंद्र बना हुआ है। प्राप्त विवरण के अनुसार संत श्रीरंग देशिक ने वृंदावन धाम में श्रीरंग दिव्यदेश अर्थात श्रीरंग मंदिर की प्रतिष्ठा की थी। वृंदावन का श्रीरंगजी मंदिर अपने स्थापत्य एवं शिल्प के लिए अद्भुत है। इस मंदिर के उत्सवों में से पौष का ब्रह्मोत्सव तथा चैत्र का वैकुंठोत्सव मुख्य है। श्रीरंगजी के मंदिर के सम्मुख श्री गोविंददेव जी का प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर संत व्रज नाभ द्वारा स्थापित है। यवन उपद्रव के समय यह मूर्ति यहां के शासकों द्वारा जयपुर भेजी गई थी और आज भी वहां के राजमहल में विराजमान है।

श्रीरंगजी के मंदिर के पीछे की कहानी :-

श्रीरंगजी के मंदिर के पीछे ज्ञानगूदड़ी स्थान है। यह विरक्त महात्माओं की भजन स्थली है। अब यहां पर एक श्रीराम मंदिर है। कहते है कि उद्धव जी का गोपियों के साथ संवाद यहीं हुआ था। मूल श्रीरंग मंदिर के संबंध में कथा प्रचलित है कि दक्षिण भारत के इस मंदिर में प्रतिष्ठापित श्रीरंगनाथ की मूर्ति विष्णु भगवान ने पहले ब्रह्मा को दी थी। राजा इक्ष्वाकु ने कठोर तप करके ब्रह्मा जी से इसे प्राप्त किया था और अयोध्या में स्थापित किया था। राज्याभिषेक के समय जब श्रीराम सबको मुंहमांगी वस्तु प्रदान कर रहे थे, तो विभीषण ने उनसे श्रीरंग की मूर्ति मांगकर, लंका में उसकी स्थापना के उद्देश्य से उसे अपने साथ ले जाने लगे। मार्ग में विभीषण ने अपने विमान को कावेरी के द्वीप में उतारा। देवता नहीं चाहते थे कि यह मूर्ति लंका चली जाए। विभीषण ने यहां से मूर्ति को ले जाने का यत्न किया तो वह उसे उठा न सके। इस पर श्रीरंग ने कहा कि राजा इक्ष्वाकु ने मुझे पाने के लिए कठोर तप किया है। तुम यहीं आकर मेरा दर्शन किया करो। मैं लंका की ओर मुख करके यहीं रहूंगा।
कालांतर में श्रीरामानुज संप्रदाय की परंपरा में दीक्षित संत श्रीरंग देशिक ने वृंदावन में श्रीरंगमंदिर की प्रतिष्ठाना की। यह पवित्र देव स्थल भारत की अक्षुण्ण एवं सनातन धार्मिक-परंपरा के निर्बाध-प्रवाह की सतत याद दिलाता है।
rang ji temple
यह वृंदावन का सबसे बड़ा मंदिरों में से एक है और उच्च दीवारों से घिरा हुआ है। एक साल में एक भव्य कार त्योहार (रथयात्रा) को चतुर्थ महीना (मार्च-अप्रैल) के दौरान ब्रह्मोत्सव के रूप में जाना जाता है। यह त्योहार 10 दिन तक रहता है। प्रवेश द्वार पर, कृष्ण के कहानियों और एक छोटे संग्रहालय के बारे में एक इलेक्ट्रॉनिक कठपुतली शो है

  • इस मंदिर खूबसूरती देखती बनती है इसके अंदर कई स्तंभ है और उन स्तंभ पे बहुत ही सुन्दर कलाकृतिया है जो हर किसी को अपनी और खींचती है।
  • इस मंदिर के अंदर कुंड भी है जिसे ब्रह्हा कुंड भी कहते है।
  • मंदिर के परिसर में, पत्थर नक्काशीदार खंभे है जिसकी खूबसूरती को कोई शब्दों में क्या बताये।

साल में एक बार खुलता है इस मंदिर का दरवाजा

  1. श्रीरामानुज संप्रदाय के मंदिर में श्रीरंगनाथ या रंगजी (भगवान विष्‍णु) विराजमान हैं।
  2. वह शेषनाग पर मूर्ति रूप में हैं। उनके चरणों पर भगवान लक्ष्‍मी बैठी हैं। ब्रह्मा वेदों का पाठ कर रहे हैं।
  3. इसके नीचे सोने की तीन अन्‍य मूर्तियां हैं। बाईं तरफ श्रीदेवी (लक्ष्‍मी), दाएं में भूदेवी और बीच में रंगनाथ (विष्‍णु) दाएं हैं।
  4. मंदिर के सातवें दरवाजे का नाम वैकुंठ दरवाजा है।
  5. वह केवल वैकुंठ एकादशी के दिन खोला जाता है। अब अगला बैकुंठ एकादशी 09 जनवरी 2017 को होगा।
  6. इस दिन सुबह चार बजे मंगला आरती के लिए दरवाजा खुलता है और भगवान की 11 पालकी इसी दरवाजे से मंदिर के अंदर जाती है।
  7. पालकी के साथ हजारों लोग इस दरवाजे से प्रवेश करते हैं।

आरती:-

आरती एक दिन में दो बार होती है। गर्मी में  5:30AM to 6:00AM और शाम को 6:30PM TO 7:00PM  और ठण्ड में 6:00AM TO 6:30AM और शाम को 6:00AM TO 6:30AM

मंदिर का समय (Temple Timings):-

गर्मी में 
सुबह मंदिर खुलता है:- 5:30 AM – 10:30 AM
सांयकाल :4:00 PM – 9:00 PM

ठण्ड में 

              सुबह मंदिर खुलता है:- 6:00AM to 11:00PM
सांयकाल :3:30 PM – 8:30 PM

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