जगन मोहिनी केशव स्वामी मंदिर(Jagan Mohini Keshava Swami Temple)

जगन मोहिनी केशव स्वामी मंदिर(Jagan Mohini Keshava Swami Temple)

Description

जगन मोहिनी केशव स्वामी मंदिर(Jagan Mohini)

स्थान :(Location)

रियाली(Ryali) भारत के पूर्वी गोदावरी जिले (अत्रिपुरम मंडलम) में स्थित है। इस क्षेत्र को कोना सीमा भी कहा जाता है, जो गोदावरी नदी की कई सहायक नदियों के कारण आंध्र प्रदेश  का सिंचित क्षेत्र है। प्रसिद्ध श्री जगन मोहिनी (श्री महा विष्णु) मंदिर यहाँ स्थित है। श्री जगन मोहिनी केशव स्वामी की समाधि का एक पत्थर (सालगराम एकशीला – 5 फीट ऊँचाई और 3 फीट चौड़ाई) से बनी है। जगन मोहिनी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है।
मूर्ति के सामने का भाग  भगवान विष्णु को नर रूप में चित्रित कर रहा है, और पिछला भाग स्त्री रूप का है जो जगन मोहिनी का है। मूर्ति एक विशिष्ट महिला के रूप में  है जिसमें बालों की सजा  फूलों के साथ हुआ है। उसके पैरों में गहने हैं।

जगन मोहिनी मंदिर(Jagan Mohini amndir) को किसने बनवाया था?

यह स्थान 11 वीं शताब्दी के दौरान विशुद्ध रूप से एक जंगली जंगल था. मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी के दौरान चोल राजा, श्री राजा विक्रम देव द्वारा किया गया है।

जगन मोहिनी(Jagan Mohini) का अवतार कैसे हुआ :

पौराणिक कथा श्रीमद् भागवत(shrimad Bhagwat) के अनुसार, समुन्द्र मंथन से एक अमृत का कलश निकला था। और इस अमृत को देवता और दानव दोनों ही लेना चाहता थे।  देवता और दानव में अमृत को लेकर युद्ध हो रहा था। तभी इस अमृत को बाटने के लिए श्री विष्णु जी ने मोहिनी अवतार लिया। जगन मोहिनी वही श्री विष्णु भगवान का अवतार है स्त्री रूप में।  इस मोहिनी अवतार में मोहिनी जी का रूप इतना मोहक था की देवता और असुर दोनों ही मोहित हो गए और ये जाने बिना की ये विष्णु भगवान का ही अवतार है। दानव ने उनकी बात मान ली और अमृत कलश मोहिनी भगवान को दे दिया। मोहिनी की आड़ में भगवान ने सारा अमृत देवताओ को पीला दिया।
भगवान शिव ने मोहिनी की सबसे आकर्षक सुंदरता को देखा। उन्होंने कुछ समय के लिए अपनी पत्नी पार्वती देवी की उपस्थिति के बिना ही उनका पीछा किया। यह सामान्य धारणा है कि पवित्र घटना “अय्यप्पा स्वमी” के जन्म का परिणाम थी। शिव जी ये नहीं समझ पाए की ये विष्णु भगवान है जब उनको पता चला।  तब उन्होंने आश्चर्यजनक रूप से मोहिनी के रूप में “श्री महा विष्णु” पाया और अपने व्यवहार के लिए शर्म महसूस की। जिस स्थान पर मोहिनी के फलक से फूल गिरे थे, उसका नाम ‘गिर’ के रूप में दिया गया।
इसी कारण से रियाली के रूप में जाना जाने वाला यह स्थान भगवान शिव और श्री महाविष्णु के ऊपर बना हुआ है, जिसके पीछे मोहिनी के रूप में भगवान ब्रह्मा ने शिव लिंगम को अपने कमंडलम से अभिषेक किया और इसलिए रियाली में भगवान शिव को श्री उमा कमंडलसेरा स्वामी वरु, श्री के रूप में पूजा जाता है। मूर्ति के सामने का भाग  भगवान विष्णु को नर रूप में चित्रित कर रहा है, और पिछला भाग स्त्री रूप का है जो जगन मोहिनी का है। मूर्ति एक विशिष्ट महिला के रूप में  है जिसमें बालों की सजा  फूलों के साथ हुआ है। उसके पैरों में गहने हैं। श्री जगनमोहिनी केशव स्वामी वरुण के रूप में पूजा जाता है, शिव और विष्णु मंदिर दोनों एक दूसरे के सामने स्थित हैं। रियाली में यह बहुत ही दुर्लभ विशेषता है जहां विष्णु और भगवान शिव मंदिर पूर्व, पश्चिम दिशा में एक दूसरे का सामना करते हैं।

जगन मोहिनी मंदिर के प्रसिद्ध त्यौहार( famous Festivals of Jagan Mohini mandir):-

  • श्री जगनमोहिनी केशव स्वामी कल्याणम जो चैत्र शुद नवमी से पूर्णमी तक है जो मार्च / अप्रैल के दौरान होता है।
  • श्री राम सत्यनारायण स्वामी कल्याणम जो विशाखा सुधा एकादशी से पूर्णमी तक है।
  • श्री वेणुगोपाला स्वामी कल्याणम जो ज्येष्ठ सुधा एकादशी से जून के महीने में पूर्णमनी तक है।
  • श्रवण बहुला अष्टमी श्री कृष्ण अष्टमी (अगस्त)। श्रावण बहुला अष्टमी जिसे अगस्त में श्री कृष्णस्वामी के नाम से भी जाना जाता है।
  • कार्तिका सिद्ध द्वादशी (क्षीरबाड़ी द्वादशी) (नवंबर)।
  • देवी नवरात्र (अक्टूबर)।
  • मुकोटि एकादशी।
  • भीष्म एकादशी।

जगन मोहिनी मंदिर का समय (jagan mohini temple timing):

06:00 से 12:00 AM (सप्ताह के सभी दिन (सुबह)) (All days of the week(Morning))
04:00 से 08:00 PM (सप्ताह के सभी दिन) (शाम) (All days of the week(Evening))

शंख और चर्चा के साथ श्री महा विष्णु के रूप में श्रीदेवी, बूदेवी, संत नारद और उनके अंगूठा, रामबा, ऊरवसी, किन्नरा, किमपुरुष, गोवर्धन कृष्ण, आदि शेशा (सर्प), गरुड़ और गंगा देवी के रूप हैं। मूर्ति के चरणों में भूमिगत से पानी टपकता रहता है। यह पानी भगवान के चरणों में फूल चढ़ाता है और भक्तों पर इन फूलों का पानी छिड़का जाता है। श्री लक्ष्मी नारायण स्वामी के साथ श्री लक्ष्मी देवी के लिए भी एक अलग मंदिर है
प्रसिद्ध श्री जगन मोहिनी हमारी विरासत(hamari virasat) में से एक है। जो न जाने जाने कई साल से इस देश की विरासत के रूप में शोभा बढ़ा रहा है।  हमारी छोटी से कोशिश है की नयी पीढ़ी और आने वाली भविष्य की युवा पीढ़ी भी जान सके।  जो जगह जो हमारे शास्त्र में जिनकी उपस्थिति मिलती है। ये सभी स्थान भगवान के काल से जुडी हुए है। और कितनी ही अद्भुत है। इन जगह पे पहुंच कर आपको एक अलग ही सकरात्मक शक्ति महसूस होगी।

हमें क्यों इन आध्यात्मिक स्थान पे जाना चाहिए ?

कहते है हर जगह की एक अपनी तरंग होती है। एक आध्यात्मिक शक्तियों की आराधना होती है।  जंहा जाकर वो शक्तियां हमें महसूस होती है और उनका प्रवेश हमारे  अंदर होता है। जिससे हमारे अंदर की बुराइया निकलती है। और हम अपने अशांत जीवन को शांत बनाते है।

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