अयोध्या

अयोध्या

Description

एक वीर योद्धा की जन्मभूमि

सरयू नदी के किनारे पर  पवित्र शहर अयोध्या(Ayodhya) है। यह भगवान विष्णु के सातवें अवतार के रूप में माना जाता है, जो कि श्री राम जी का जन्मस्थान है। अयोध्या एक प्रमुख तीर्थ स्थान है यहाँ मंदिरों(temple) का अयोध्या में कई धर्मों ने बड़े पैमाने पर और साथ-साथ कई बार समयावधि में भी विकास किया है। हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म के अवशेष, अब भी अयोध्या में पाये जा सकते हैं। रामायण में अयोध्या के बारे में उल्लेख है कि शहर की स्थापना हिंदुओं के विधायक मनु ने की थी। अयोध्या को शुरूआती कोसल देश  के नाम से जाना जाता था और सत्ताधारी राजवंश के रूप में जाना जाता था। श्री राम जी सूर्यवंश राजवंश के थे।

अयोध्या पुण्यनगरी है। अयोध्या श्रीरामचन्द्रजी की जन्मभूमि होने के नाते भारत के प्राचीन साहित्य व इतिहास में सदा से प्रसिद्ध रही है। अयोध्या की गणना भारत की प्राचीन सप्तपुरियों में प्रथम स्थान पर की गई है। अयोध्या के श्री राम, राम जू की अजोध्या …! त्रेता, द्वापर और अब कलयुग…लाखों वर्ष बाद, आज भी राम अचल हैं अविनाशी हैं. जब तक राम हैं तभी तक अयोध्या का महत्व रहेगा और जब तक अयोध्या रहेगी तब तक प्रभु श्री राम करोड़ों हृदयों में वास करते रहेंगे . लाखों वर्ष से मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम पाप पुण्य की कसौटी पर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते रहे हैं. उनके कृपा पात्र भक्त, साधो, सन्यासी उनके दर्शन को सदैव लालायित रहते हैं. उनकी राम के प्रति भक्ति, प्रेम और उन्हें महसूस करने की लालसा दूरी नहीं देखती. इस पावन धरती पर पहुँचने का संघर्ष नहीं देखती, समय नहीं देखती. वो दीन दुनिया भूल के अपने राम के सानिध्य में कुछ समय बिताने के लिए यहाँ आते हैं. वो उन पवित्र स्थानों पर बने मंदिरों में राम को, उसी रूप में देखते हैं. जिस रूप में कभी राम ने जन्म लिया होगा, कहीं सखाओं के साथ खेले होंगे, कहीं विवाहोपरांत सीता माता के साथ पहले कदम रखें होंगे, कहीं लंका विजय के बाद अपनी प्रजा के साथ उत्सव मनाया होगा. कभी लोक कल्याणी प्रभु श्री राम के कदमों से धन्य हुयी अयोध्या मोक्ष दायनी सरयू नदी के आचमन से जिवंत रहती है. अथर्व वेद में इसे देवों द्वारा निर्मित स्वर्ग नगरी कहा गया है.

गंगा बड़ी गोदावरी,

तीरथ बड़ो प्रयाग,

सबसे बड़ी अयोध्यानगरी,

जहँ राम लियो अवतार।

अयोध्या शब्द का अर्थ :-

अयोध्या(Aayodhya) शब्द का स्पष्ट अर्थ है “जो हराया नहीं जा सकता” इस तीर्थस्थान में कई मंदिर हैं। और अधिकतर मंदिर भगवान राम और उनके परिवार और मित्रो को समर्पित हैं।

अयोध्या भगवान राम जन्मभूमि:-

प्राचीन समय के दौरान अयोध्या को  कोशल  देश  के नाम से जाना जाता था अथर्ववेद ने इसे “देवता द्वारा बनाया गया शहर और स्वर्ग के रूप में समृद्ध होने” के रूप में वर्णन किया सूर्यवंश इस शानदार और मशहूर कोशल देश का शासक वंश था।
अयोध्या श्री राम जन्मभूमि(shri ram janam bhoomi) है, जहां भगवान राम जी का जन्म हुआ था।  यहां एक छोटा सा भगवान राम मंदिर है।  वहां बाबरी मस्जिद का इस्तेमाल हुआ था, जो 15 वीं सदी में मुग़ल द्वारा निर्मित किया गया था। बाद में 1992 में मस्जिद थोड़ी नष्ट हो गई थी, और वर्तमान समय में एक भव्य राम मंदिर का निर्माण करने की योजना है।

सर्वधर्म नगरी:-

अयोध्या हिन्दू धर्म के आस्था का केंद्र है . अयोध्या को प्रभु श्री राम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्धि मिली. पर यह धरती कई धर्मों के लिए महत्पूर्ण रही है. इस धरती पर सिख, बौध, जैन, सूफ़ी धर्म गुरुओं ने अपनी अपनी तरीके से अध्यात्म का यश फैलाने पर काम किया है. जिसकी खुशबू यहाँ के सौहार्दपूर्ण  वातावरण में महसूस होती है.  अयोध्या में भगवा ध्वजमालाएंप्रसाद बनाने वाले आधे से अधिक कारीगर मुसलमान हैं।
यहाँ कुछ प्रमुख स्थान है जहां प्रसिद्ध मंदिर और ऐतिहासिक जगह है 

कनक भवन:-

कनक भवन अयोध्या का एक महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर सीता और राम के सोने के मुकुट पहने प्रतिमाओं के लिए लोकप्रिय है. मुख्य मंदिर आतंरिक क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें रामजी का भव्य मंदिर स्थित है। यहां भगवान राम और उनके तीन भाइयों के साथ देवी सीता की सुंदर मूर्तियां स्थापित हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार राम विवाह के पश्‍चात् माता कैकई के द्वारा सीता जी को कनक भवन मुंह दिखाई में दिया गया था। जिसे भगवान राम तथा सीता जी ने अपना निज भवन बना लिया

गुप्तर घाट:-

अयोध्या मुख्य रूप से मंदिरों का एक पवित्र तीर्थस्थान है। पूजा के सभी स्थान यहां हैं, जिनमें हिंदू धर्म भी शामिल है। उत्तर प्रदेश के एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र होने के दौरान अयोध्या सबसे पवित्र रहा है। जब भगवान पृथ्वी पर उपस्थित थे, अयोध्या उनकी गतिविधियों का केंद्र था।
गुप्तर घाट में अच्छे मंदिरों का एक गुच्छा है और इसके पास एक अच्छा पार्क है। गुप्तर को गायब होने के रूप में परिभाषित किया गया है यह वह स्थान है जहां राम ने अपना शरीर छोड़ दिया। यहां कुछ अच्छे मंदिर मौजूद हैं, जिसे चक्र हरजी विष्णु, गुप्त हरजी और अन्य राजा मंदिर कहते हैं। चक्र हरजी विष्णु मंदिर में बहुत से देवता हैं, जिसमें बहुत पुराने नक्काशीदार चक्र हरजी विष्णु देवता प्रतीत होता है। यहां श्री राम के पैर की एक छाप भी है। 1 9वीं शताब्दी में राजा दशरथ सिंह ने मंदिर और छोटे महल का निर्माण किया। Read More…

रामकोट :-

जन्मभूमि अयोध्या में पूजा के प्रमुख और महत्वपूर्ण स्थान रामकोट के प्राचीन गढ़ की जगह है, जो शहर के पश्चिमी भाग में एक ऊचे भूमि पर खड़ा है। यह पवित्र स्थान पूरे भारत और विदेश से भक्तों को आकर्षित कर रहा है, भगवान के जन्म के दिन ‘रामानवमी’ पर, इस जगह को उमंग फूलों से सजाया जाता है और बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है जो की  चैत्र (मार्च-अप्रैल) के हिंदू माह में। Read More…

हनुमान गढ़ी:-

यहाँ  श्री  हनुमान जी वास करते हैं।  अयोध्‍या आकर भगवान राम के दर्शन के लिए भक्तों को हनुमान जी Hanuman Aarti के दर्शन कर उनसे आज्ञा लेनी होती है. 76 सीढ़ियों का सफर तय कर भक्त पवनपुत्र के सबसे छोटे रूप के दर्शन करते हैं.अयोध्या नगरी में आज भी भगवान श्रीराम का राज्य चलता है. मान्यता है कि भगवान राम जब लंका जीतकर अयोध्या लौटे, तो उन्होंने अपने प्रिय भक्त हनुमान को रहने के लिए यही स्थान दिया. साथ ही यह अधिकार भी दिया कि जो भी भक्त यहां दर्शन के लिए अयोध्या आएगा, उसे पहले हनुमान का दर्शन-पूजन करना होगा…Read More….

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त्रेता के ठाकुर:-

त्रेता के ठाकुर का यह विशेष स्थान है, जहां पर श्री राम ने अश्वमेधा यज्ञ का प्रदर्शन किया है। अश्वमेधा यज्ञ इस रीति से किया गया था, हर तरफ घूमने के लिए घोड़ों को छोड़ दिया गया था। उन स्थानों पर जहां घोड़े जायेंगे, वे यज्ञ कलाकार के शासनकाल में आएंगे।
लगभग 300 साल पहले कुल्लू के राजा ने यहां एक नया मंदिर बनाया था, जो इंदौर के अहिल्याबाई होलकर ने 1784 की अवधि में सुधार किया था। इसी समय, अन्य सटे घाट भी बनाए गए थे। काले बलुआ पत्थर की प्रारंभिक मूर्तियां सरयू से बरामद की गईं और नए मंदिर में रखीं, जो अब कलरम का मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हैं। Read More..

नागेश्वरनाथ मंदिर  :-

शिव पुराण के अनुसार, एक बार नौका बिहार करते समय उनके हाथ का कंगन पवित्र सरयू में गिर गया, जो सरयू में वास करने वाले कुमुद नाग की पुत्री को मिल गया। यह कंगन वापस लेने के लिए राजा कुश तथा नाग कुमुद के मध्य घोर संग्राम हुआ। जब नाग को यह लगा कि वह यहां पराजित हो जायेगा तो उसने भगवान शिव का ध्यान किया। भगवान ने स्वयं प्रकट होकर इस युद्ध को रुकवाया। Read More

कालेराम मन्दिर :-

काले राम मंदिर राम की पैड़ी के पास स्थित नागेश्वर नाथ मंदिर के ठीक पीछे है, यह मन्दिर भी प्राचीन मन्दिरों में गिना जाता है. मन्दिर के महंत के अनुसार के राजा दर्शन सिंह के समय लगभग  1748 में भारत के महाराष्ट्रिय ब्राह्ममण योगी पं0 श्री नरसिंह राव मोघे को  एक स्वप्न में हुए आदेश के अनुसार Read More

छोटी देव काली जी का स्थान :-

मान्यता है कि छोटी  देवकाली की प्रतिष्ठा माता जानकी की ग्राम देवी या कुल देवी के रूप में हुयी. जगत जननी माँ सीता जी विवाहोपरांत अपने पितृ गृह जनकपुरी से जब  अयोध्या के लिए चलीं, तो अपनी कुल देवी जो कि  गौरी मंगला के रूप में थीं, अपने साथ ले आयीं. इसके पश्चात Read More

क्षीरेश्वर मन्दिर:-

क्षीरेश्वर मन्दिर अयोध्या के प्राचीन मन्दिरों में से एक है. इस मन्दिर में स्वयंभू शिवलिंग का प्राकट्य इस मन्दिर को विशेष बनाता है. मन्दिर के पुजारी के अनुसार मन्दिर के गर्भ गृह में स्वम्भू शिवलिंग, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर में शिवलिंग के समान है.  क्षीरेश्वर मन्दिर अयोध्या फैजाबाद मार्ग पर श्री राम हॉस्पिटल के ठीक सामने स्थित है. मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण मन्दिर के दर्शन सुगम हो जाते हैं. क्षीरेश्वर मन्दिर महादेव का मन्दिर है. ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त इस मन्दिर में स्थापित शिवलिंग की पूरे विधि विधान से पूजा करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है.

विजय राघव मन्दिर:-

अयोध्या को मन्दिरों की नगरी भी कहा जाता है, यहाँ करीबन 7000 से अधिक मन्दिर हैं. पर विजय राघव मन्दिर अपने आप में निराला मन्दिर है.  यह रामानुज सम्प्रदाय का प्राचीन एवं प्रमुख मन्दिर   है. जो कि विभीषण कुण्ड के सामने स्थित है. मन्दिर की स्थापना 1904 के लगभग स्वामी बलरामाचारी द्वारा की गयी थी. इस मन्दिर में स्थापित प्रभु राम के विगृह को दक्षिण भारत से ही लाया गया था. यह मन्दिर रामानुज सम्प्रदाय के अत्यंत महत्व वाला मन्दिर है. वैष्णवों के लिए यह स्थान किसी तीर्थ से कम नहीं है. इस मन्दिर में अनुशासन के साथ गुरुकुल एवं वैदिक परम्पराओं का अनुसरण किया जाता है

लवकुश मन्दिर:-

यह मन्दिर अयोध्या के ह्रदय कहे जाने वाले रामकोट में राम जन्म भूमि के निकट स्थित है. यह स्थाम यूँ तो श्री राम के पुत्र लव कुश जी का  है, पर यहाँ सावन झूला महोत्सव और तुलसी शालिगराम विवाह अत्यंत प्रचलित है. राम जन्म भूमि के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु भगवान श्री राम के पुत्रगण लव कुश के दर्शन अवश्य करते हैं.

रंगमहल:-

अयोध्या के रामकोट मोहल्ले में राम जन्म भूमि के निकट भव्य रंग महल मन्दिर स्थित है. ऐसा माना जाता है कि जब सीता माँ विवाहोपरांत अयोध्या की धरती पर आयीं. तब कौशल्या माँ को सीता माँ का  स्वरुप इतना अच्छा लगा कि उन्होंने रंग महल सीता जी को मुँह दिखाई में दिया. विवाह के बाद भगवान श्री राम कुछ 4 महीने इसी स्थान पर रहे. और यहाँ सब लोगों ने मिलकर होली  खेली थी. तभी से इस स्थान का नाम रंगमहल हुआ. इस मन्दिर में आज भी होली का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया जाता है. फाल्गुन माह में यहाँ होली खेलने का विशेष इंतजाम होता है.

रत्न सिंहासन/ राजगद्दी:-

रत्न सिंहासन या राजगद्दी वह स्थान है जहाँ श्री राम भगवान ने 11000 वर्ष बैठ के राज किया. उन्होंने यहाँ बैठ के ही अपनी प्रजा का न्याय किया. जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम लंका के राजा रावण का वध करके पहली बार अयोध्या वापस आये, तब उनका राज्याभिषेक इसी सिंहासन पर किया गया. हर्षित होकर देवताओं ने फूल बरसाए, इंद्र कुबेर ने सोने चांदी एवं मणियों से सवा प्रहर तक राज्याभिषेक किया. पूरे अयोध्या को दीपों से सजाया गया. इस मन्दिर के गर्भ गृह में  प्रभु श्री राम जी हैं, दाहिने तरफ लक्ष्मण जी और बाएं तरफ जगत माता सीता जी विराजमान हैं . उनके पीछे अत्यंत प्राचीन विग्रह हैं

मणि पर्वत:-

मणि पर्वत मन्दिर  लगभग 200 फीट ऊँचे टीले पर स्थित है. इसकी छत से पुरे अयोध्या के दर्शन होते हैं. भगवान श्री राम के विवाह के पश्चात से यहाँ झूले की परंपरा चली आ रही है. मान्यता है कि झुला महोत्सव के रूप में मनाये जाने वाले इस अवसर पर अयोध्या में विराजमान समस्त भगवान यहाँ झूला झूलने आते हैं. सावन के महीने में माता सीता ने जी ने इस स्थान पर पंचमी मनाई थी, झूला झूली थी. तभी से यहाँ झूला उत्सव मनाया जाता है.

ऐतिहासिक गुरुद्वारा ब्रम्हकुण्ड:-

यह तीर्थ सिखों के लिए अत्यंत पवित्र है. सिखों के प्रथम नवं एवं दसम गुरुओं ने इस धरती पर अपने श्री चरण रखे. गुरुओं के आने और यहाँ प्रवचन देने से इस स्थान की महत्ता और बढ़ गयी.  उसके पूर्व से यह स्थान ब्रम्ह कुण्ड के नाम से जाना जाता था. बताया जाता है जब श्री राम अयोध्या पूरी को आये थे, उस समय सारे देवता यहाँ आये थे राजतिलक देने के लिए. राजतिलक में ब्रम्हा जी भी आये थे. राज्याभिषेक होने के बाद ब्रम्हा जी ने राम चन्द्र जी से कहा कि  मेरा भी उद्धार करो, तब श्री राम चन्द्र जी ने कहा कि तुम तप करो. पहले इस जगह का प्राचीन नाम तीर्थराज था

कोरिया की रानी ‘हो’ का स्मृति स्थल:-

यह कम अचरज की बात नहीं है कि हमारे देश विभिन्न धर्मों के गुरुओं ने अयोध्या की पावन धरती को भक्ति भाव से अभिसिंचित किया है. तब और आश्चर्य होता है जब यह पता चलता है कि यहाँ से हजारों किलोमीटर दूर  दक्षिण कोरिया के लिए भी यह स्थान उतना ही महत्वपूर्ण है जितना हम भारतियों के लिए . कोरिया की पुरातन इतिहास गाथा के अनुसार प्राचीन कोरियाई कारक राज्य के संस्थापक राजा सूरो की धर्मपत्नी रानी हो का जन्म अयोध्या नगर में हुआ था.

अयोध्या आये  तो इन सभी स्थानो पे जरूर जाये।

जय श्री राम