श्री गणेश भगवान (Shri Ganesh Ji)

श्री गणेश भगवान (Shri Ganesh Ji)

प्रथम पूज्य देव

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Description

श्री गणेश (shri ganesh ji) को प्रथम पूजनीय देव कहा जाता है। श्री गणेश हिंदू धर्म में हाथी के सिर वाले देवता हैं। वह शिव और पार्वती के पुत्र हैं। नई शुरुआत, समृद्धि, बुद्धि और सफलता के देवता और जीवन से बाधाओं को दूर करने वाले भगवान

श्री गणेश हिंदू धर्म में एक बहुत लोकप्रिय देवता हैं, और सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवताओं में से एक थे। हिंदू परंपरा में कहा गया है कि गणेश ज्ञान, सफलता और सौभाग्य के देवता हैं। वह विभिन्न प्रकार के उपकारों के दाता भी हैं। हिंदू परंपरा गणेश को विघ्नेश्वर के रूप में बुलाती है। संस्कृत भाषा में “विघ्नेश्वर” का अर्थ है जो बाधाओं या कठिनाइयों का स्वामी था। इस प्रकार, हिंदू परंपरा कहती है कि गणेश की पूजा करने से सभी बाधाओं और कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है।

Shri Ganesh Ji

श्री गणेश कथा:-

भगवान् श्री गणेश जो भगवान् शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं वह समस्त देवो में सर्वप्रथम पूजनीय हैं इनकी पूजा के बिना कोई भी पूजन या मंगल कार्य कभी पूर्ण नहीं होता है क्योंकि ये विघ्ननाशक हैं समस्त विघ्नों का नाश करने वाले हैं । भगवान श्री गणेश शीघ्र प्रसन्न होने वाले स्वभाव के स्वामी हैं । ये ऋद्धि सिद्धि के दाता हैं ।

भगवान् श्री गणेश जो भगवान् शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं वह समस्त देवो में सर्वप्रथम पूजनीय हैं इनकी पूजा के बिना कोई भी पूजन या मंगल कार्य कभी पूर्ण नहीं होता है क्योंकि ये विघ्ननाशक हैं समस्त विघ्नों का नाश करने वाले हैं । भगवान श्री गणेश शीघ्र प्रसन्न होने वाले स्वभाव के स्वामी हैं । ये ऋद्धि सिद्धि के दाता हैं ।

अन्य नाम:-

गणपति, विनायक, गजानन, गणेश्वर, गैरीनंदन, गौरीपुत्र, श्री गणेश, गणधिपति, सिद्धिविनायक, अष्टविनायक, बुद्धिपति, शुभकर्ता, सुखकर्ता

निवासस्थान:-

गणेश लोक

श्री गणेश बीज मंत्र:-

गणपति जी का बीज मंत्र ‘गं’ है

मंत्र : ऊँ गं गणपतये नम: ||

ॐ वक्रतुंडाय विद्महे एकदंताय धिमहि तन्नो ददंती प्रचोद्यात ।

अस्त्रप्रतीकदिवस:-

त्रिशूल, तलवार, अंकुश, पाश, मोदक और परसु. प्रतीक, स्वास्तिक और मोदक, दिवस, बुधवार

गणपति जी के वाहन का नाम:-

डिंक (मूषक-चूहा) नामक वाहन,

श्री गणेश जी का विशेष विचार:-

एक बार सभी देवताओं में सर्वश्रेष्ठ होने की प्रतियोगिता हुई प्रतियोगिता के अनुसार सभी देवताओं को पृथ्वी की परिक्रमा करनी थी । प्रतियोगिता प्रारंभ होते ही सभी देवी देवता पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए चल पड़े परन्तु श्री गणेश ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया और अपने माता पिता को ही अपनी दुनिया मान कर उनकी परिक्रमा कर ली और समस्त देवो में विजयी हुए और भगवान् शिव से सर्वप्रथम पूजनीय होने का आशीर्वाद प्राप्त किया ।

श्री गणेश द्वादशनामावली:-

गणेशजी के अनेक नाम हैं लेकिन ये 12 नाम प्रमुख हैं। निम्नलिखित श्री गणेश के द्वादश नाम नारद पुरान मे पहली बार गणेश द्वादश नामावलि मे लिखित है | विद्यारम्भ तथ विवाह के पूजन के प्रथम मे इन नामो से गणपति की अराधना का विधान है | नारद पुराण में लिखित श्री गणेश द्वादशनामावली –

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुःकामार्थसिद्धये ॥ १॥
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥ २॥
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥ ३॥
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥ ४॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरः प्रभुः ॥ ५॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥ ६॥
जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥ ७॥
अष्टेभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥ ८॥

उपरोक्त द्वादश नामावली के अनुशार श्री गणेश के १२ नाम – 

  1. वक्रतुंड,
  2. एकदन्त,
  3. कृष्णपिगाक्ष,
  4. गजवक्त्रं,
  5. लम्बोदर,
  6. विकट,
  7. विघ्नराज,
  8. धुम्रवर्ण,
  9. भालचंद्र,
  10. विनायक,
  11. गणपति,
  12. गजानन हैं 

श्री गणेश अष्टावतार:-

श्री गणेश अष्टावतार पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे। Ganesh ji story

  1. वक्रतुण्ड श्री गणेश
  2. एकदन्त श्री गणेश
  3. महोदर श्री गणेश
  4. गजानन श्री गणेश
  5. लम्बोदर श्री गणेश
  6. विकट श्री गणेश
  7. विघ्नराज श्री गणेश
  8. धूम्रवर्ण श्री गणेश

विवाह:-

शास्त्रों के अनुसार गणेश जी का विवाह भी हुआ था इनकी दो पत्नियां हैं। जिनका नाम रिद्धि और सिद्धि है तथा इनसे गणेश जी को दो पुत्र हुए हैं जिनका नाम शुभ और लाभ नाम बताया जाता है, यही कारण है कि शुभ और लाभ ये दो शब्द आपको अक्सर उनकी मूर्ति के साथ दिखाई देते हैं

प्रसिद्ध श्री गणेश मंदिर:-

  1. सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई
  2. दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर, पुणे
  3. गणपतिपुले मंदिर, रत्नागिरी
  4. उच्ची पिल्लयार मंदिर, तिरुचिरापल्ली में गणेश चतुर्थी
  5. कनिपकम विनायक मंदिर, चित्तूरी
  6. मोती डूंगरी गणेश मंदिर, जयपुर
  7. कलामास्सेरी महागणपति मंदिर, केरल
  8. वरसिद्धि विनायक मंदिर, चेन्नई
  9. गणेश टोक मंदिर, गंगटोक
  10. रणथंभौर गणेश मंदिर, राजस्थान

शास्त्र:-

गणेश पुराण, शिव महापुराण और मुदगल पुराण, श्री गणेश ग्रंथ में पांच खंड है। जिनमें श्री गणेश जी के बारे में पूरी जानकारी है। पहला खण्ड – आरम्भ खण्ड -दूसरा खण्ड – परिचय खण्ड -तीसरा खण्ड – माता पार्वती खण्ड  चौथा खण्ड – युद्ध खण्ड -पांचवा खण्ड – महादेव पुण्य कथा खण्ड –

श्री गणेश के बारे में अनोखी बातें:-

  1. श्री गणेश को लाल व सिंदूरी रंग प्रिय है।
  2. दूर्वा के प्रति विशेष लगाव है।
  3. चूहा इनका वाहन है। बैठे रहना इनकी आदत है।
  4. लेखन में इनकी विशेषज्ञता है। पूर्व दिशा अच्छी लगती है।
  5. लाल रंग के पुष्प से शीघ्र खुश होते हैं।
  6. प्रथम स्मरण से कार्य को निर्विघ्न संपन्न करते हैं।
  7. दक्षिण दिशा की ओर मुंह करना पसंद नहीं है।
  8. चतुर्थी तिथि इनकी प्रिय तिथि है।
  9. स्वस्तिक इनका चिन्ह है।
  10. सिंदूर व शुद्ध घी की मालिश इनको प्रसन्न करती है।
  11. गृहस्थाश्रम के लिए ये आदर्श देवता हैं। कामना को शीघ्र पूर्ण कर देते हैं।

भगवान गणेश जी ने ही महाभारत काव्य अपने हाथों से लिखा था. पौराणिक कथा के अनुसार विद्या के साथ साथ भगवान गणेश को लेखन कार्य का भी अधिपति माना गया है.

  • पिता– भगवान शंकर
  • माता– भगवती पार्वती
  • भाई- श्री कार्तिकेय, अय्यप्पा (बड़े भाई)
  • बहन– अशोकसुन्दरी , मनसा देवी , देवी ज्योति ( बड़ी बहन )
  • पत्नी– दो (१) ऋद्धि (२) सिद्धि (दक्षिण भारतीय संस्कृति में गणेशजी ब्रह्मचारी रूप में दर्शाये गये हैं)
  • पुत्र– दो 1. शुभ 2. लाभ
  • पुत्री – संतोषी माता
  • प्रिय भोग (मिष्ठान्न)- मोदक, लड्डू
  • प्रिय पुष्प– लाल रंग के
  • प्रिय वस्तु– दुर्वा (दूब), शमी-पत्र
  • अधिपति– जल तत्व के
  • मुख्य अस्त्र – परशु , रस्सी
  • वाहन – मूषक

श्री गणेश के बारे में और अधिक पढ़ें:-

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