श्रद्धेय स्वामी रामगोविन्द दास भाईजी Swami Ramgovind das Bhaiji

श्रद्धेय स्वामी रामगोविन्द दास भाईजी Swami Ramgovind das Bhaiji Claimed

Shri Radhe

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Description

श्रद्धेय स्वामी रामगोविन्द दास भाईजी एक प्रमुख भारतीय संत और वेदान्त सिद्धान्त के दार्शनिक हैं जिनका जन्म 15 दिसंबर 1983 को हल्द्वानी, उत्तराखंड में हुआ था. (Swami Ramgovind das Bhaiji) श्रद्धेय भाईजी हरि: शरणम ‘जन’ संस्थान के प्रमुख हैं .समाज सुधार की सेवा में तत्पर वह श्रीमदभागवत के कुशल प्रवक्ता, श्री विद्या के साधक और प्रख्यात ज्योतिषविद भी हैं। ‘हरि: सर्वत्र सर्वदा’ के परम सिद्धांत को अंगीकार कर भगवान श्री श्री राधाकृष्ण जी को अपना सर्वस्व मानने वाले श्रद्धेय भाईजी के सानिध्य में पहुँचने वाला प्रत्येक व्यक्ति ‘श्री राधे’ नाम के सम्बोधन से सहज ही दीक्षित हो जाता है.

आध्यात्मिक जीवन यात्रा:-

5 वर्ष की उम्र में उन्होंने भारत के प्राचीन ऋषियों की साधक परम्परा का अनुपालन किया। हल्द्वानी में एक तपस्वी स्वामी द्वारका यति जी के सानिध्य में वे पंजाब पहुंचे जहां लोग उनकी दिव्य आभा से अभिभूत हुए। बहुत छोटी उम्र से ही उन्होंने पवित्र शास्त्रों के संदेशों का प्रसार करना शुरू कर दिया और शुद्ध जीवन जीकर लोगों को एक अच्छा मनुष्य बनाने में मदद की। तीर्थयात्रा के लिए, 21 वर्ष की आयु में उन्होंने धुरी, पंजाब छोड़ दिया जहाँ वे वहाँ एक आश्रम के संरक्षक थे, पश्चात उन्होंने सम्पूर्ण भारत के सभी चार धाम, द्वादश ज्योतिर्लिंग, चार सरोवर, सप्त पवित्र नदी, सप्त पुरी , अनेक पवित्र पर्वत , अनेक शक्ति पीठ , उपज्योतिर्लिंग, श्री कैलाश मानसरोवर , तपोवन, मुक्तिनाथ आदि अनेक दुर्गम स्थलों की पवित्र तीर्थ यात्राएं की ।

वर्ष 2003:-

वर्ष 2003 में ऋषिकेश में तीर्थयात्रा के दौरान उन्होंने भारत के प्रमुख संत परम श्रद्धेय स्वामी रामसुखदास जी महाराज के दर्शन किये, जहां स्वामी जी महाराज ने उन्हें स्वामी रामगोविन्द दास नाम दिया। जब उनकी भेंट स्वामी जी महाराज से हुई जब परम श्रद्धेय स्वामी रामसुखदास जी महाराज 100 वर्ष की आयु के थे,साधक संजीवनी आदि अनेक ग्रंथों के रचियता परम श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने श्रद्धेय भाईजी को श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य वचनों और भक्ति मार्ग का आशीर्वाद दिया।

वर्ष 2005 में:-

वर्ष 2005 में परम श्रद्धेय स्वामी जी महाराज के नश्वर रूप को छोड़ने के बाद श्रद्धेय भाईजी अपने जन्म स्थान हल्द्वानी पर वापस आ गए जहाँ उन्होंने हरि: शरणम ‘जन’ नामक एक आध्यात्मिक संगठन शुरू किया, जो ईश्वरत्व तक पहुँचने के लिए समर्पण का मार्ग था।यह संस्थान वर्तमान में विश्व स्तर पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यों द्वारा सद्भाव पैदा कर रही है |

श्रद्धेय स्वामी रामगोविन्द दास ‘भाईजी’ ने न केवल हिंदू सनातन धर्म के संपूर्ण शास्त्रों को पढ़ा, बल्कि अन्य सभी प्रमुख धर्मों के पवित्र ग्रंथों का भी गहन अध्ययन किया।श्रद्धेय भाईजी विश्व भर में भ्रमण कर सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं.

श्रद्धेय स्वामी रामगोविन्द दास ‘भाईजी’ के बाल्य काल का चित्र

समाजसेवा:-

सामाजिक भलाई के लिए खुद प्रेरित रहना और औरों को प्रेरित करना समाज को एक नई दिशा प्रदान करता है। श्रद्धेय स्वामी रामगोविन्द दास ‘भाईजी इसमें सदैव तत्पर रहते है।

संस्थान (Organization):-

हरि: शरणम ‘जन’ 1997 से स्वामी रामगोविंद दास ‘भाईजी’ के नेतृत्व में हिंदू संस्था हल्द्वानी (उत्तराखंड) में स्थापित की गयी , जो विश्व स्तर पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यों द्वारा सद्भाव को फैलाना का काम करता है।

आज ये संस्था हरि शरणम जून न केवल भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में भी पिछड़े वर्ग और असमर्थ परिवार को अच्छा स्वास्थ्य और शिक्षा देकर उनको सहयोग प्रदान कर रहा है। और देश विदेश में आध्यात्मिक प्रचार भी कर रहे है।

धर्म यात्रा:-

दुबई

उन्होंने 2016 में सद्भावना मिशन पर दुबई का दौरा किया, जिसे उन्होंने बीच में ही छोड़ दिया जब उनके साथ उनके पारंपरिक कपड़ों के लिए दुर्व्यवहार किया गया था।

लंदन

उन्होंने 2022 में गर्मियों के दौरान सद्भावना मिशन पर लंदन का दौरा किया। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक और धार्मिक नेताओं से मुलाकात की।

उन्होंने द कश्मीर फाइल्स के निदेशक विवेक अग्निहोत्री को आदर्श पुरस्कार से सम्मानित किया

आयरलैंड

उन्होंने प्राचीन स्थल को बढ़ावा देने के लिए जून 2022 में हिल ऑफ़ तारा, आयरलैंड का दौरा किया।

कार्यक्रम 2022:-

सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए हरि: शरणम ‘जन’ प्रमुख स्वामी रामगोविन्द दास ‘भाईजी’ दो महीने की लंदन यात्रा पर हैं। इस दौरान वह भारतीय नागरिकों से मिलकर उन्हें भारतीय संस्कृति और आध्यात्म के महात्म से परिचित करा रहे हैं। भाईजी ने बताया कि अब तक यात्रा का उद्येश्य सफल रहा है। यहां के लोगों का अपने धर्म, संस्कृति और माटी से अगाध प्रेम है।

भाईजी ने बताया कि लंदन में रह रहे हिंदू समुदाय के लोग अपने धर्म और संस्कृति को लेकर बेहद सजग हैं। विदेश में रहकर भी वे भारतीय संस्कृति और यहां के मूल्यों से जुड़े हुए हैं। अयोध्या में बन रहे श्री राम मन्दिर को लेकर भी यहां लोग अति उत्साहित हैं। जुलाई के प्रथम सप्ताह में हरि: शरणम ‘जन’ प्रमुख भारत वापस लौटेंगे।

आगामी कार्यक्रम:-

भाई जी करेंगे 111 निर्धन कन्याओं का कन्यादान, नवंबर में होगा भव्य आयोजन सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने वाली शहर की धार्मिक संस्था हरि: शरणम जन एक बार फिर अपने खाते में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रही है। हरि:शरणम जन प्रमुख स्वामी रामगोविंद दास भाई जी द्वारा इस बार निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए एक विशाल और भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है जो कि नवंबर माह में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम की सफलता के लिए अभी से जोर-शोर के साथ तैयारियां शुरू कर दी गयीं हैं।

संस्था प्रमुख स्वामी रामगोविंद दास भाई जी ने बताया कि 13 से 19 नवंबर के बीच श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। जिसमें मुख्य रुप से कथा का वाचन श्रद्धेय गौरव कृष्ण गोस्वामी जी करेंगे और कार्यक्रम का आयोजन शहर के एमबी इंटर कॉलेज ग्राउंड में होगा वहीं इस अवसर पर 111 कन्यादान, निर्धन कन्याओं का विवाह भी करवाए जाएंगे। बताया कि बेहद निर्धन परिवारों की मदद के लिए यह पहल की जा रही है। 19 नवंबर 2022 सुबह 9:30 बजे बेटियों के विवाह संपन्न करवाए जाएंगे। वहीं उन्होंने शहर की जनता से अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसे निर्धन लोग हैं तो वे उनका पंजीकरण 98370 53436 पर संपर्क करवा सकते हैं, विवाह में आने वाले खर्च पूरी तरह से निशुल्क होगा और पूरी रीति-रिवाज के साथ संपन्न करवाए जाएंगे।

श्री राधे।

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