विशाखा कुण्ड

विशाखा कुण्ड

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Description

विशाखा कुण्ड(vishakha kund) वृन्दावन में स्थित है। यह मथुरा से वृन्दावन 12 कि.मी. की दूरी पर है। जिस प्रकार सेवाकुंज में ललिता कुण्ड है, उसी प्रकार से निधुवन में विशाखा कुण्ड है। यहाँ प्रिय सखी विशाखा की प्यास बुझाने के लिए श्रीराधाबिहारी जी ने अपने वेणु से कुण्ड प्रकाश कर उसके मीठे, सुस्वादु जल से विशाखा और सखियों की प्यास बुझाई थी। कालान्तर में प्रसिद्ध भक्ति संगीतज्ञ स्वामी हरिदास ने इस निधिवन के विशाखा कुण्ड(vishakha kund) से श्री बाँके बिहारी ठाकुर जी को प्राप्त किया था।

भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में अनेक लीलाएं की थीं। हर लीला के माध्यम से भगवान ने जगत को खास संदेश दिए। भले ही कालीयदमन लीला से प्रदूषण मुक्ति का संदेश हो या फिर चीरहरण लीला से यमुनाजी का महत्व ब्रजगोपियों और ब्रजवासियों को समझाने का संदेश हो। निधिवन राज मंदिर के सेवायत बच्चू गोस्वामी पुराणों का उल्लेख करते हुए बताते हैं
कि एक समय जब भगवान राधारानी और अन्य सखियों के साथ रास रचा रहे थे, तब राधारानी की प्रिय सखी विशाखा सखी को प्यास लगी। उन्होंने अपनी व्याकुलता की जानकारी भगवान श्रीकृष्ण को दी। विशाखा सखी की प्यास बुझाने को जब आसपास कोई साधन न मिला, तो भगवान ने अपनी बांसुरी से जहां वह लीला रच रहे थे, उसी स्थान पर एक कुंड खोद दिया। वह कुंड आज भी निधिवन राज मंदिर में ठा. बांकेबिहारजी की प्राकट्य स्थली के समीप स्थित है। जिसे विशाखा कुंड के नाम से जाना जाता है। आज भी दुनियाभर के श्रद्धालु इस कुंड के दर्शन को वृंदावन पहुंचते हैं।